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Municipal Corporation: समग्र आईडी में अपडेशन बनी चुनौती, अभी भी शहर की आधी आबादी दूर

- नगर निगम क्षेत्र में 1.59 लाख लोगों की नहीं हुई इ-केवायसी - घर-घर पहुंच रही नगर निगम की टीम

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Municipal Corporation Office

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नगर निगम में निवासरत आबादी में समग्र आईडी/इकेवायसी का अपडेशन चुनौती बनी हुई है। लगातार प्रयासों के बाद भी अभी आधी जनसंख्या दूर है। निगम कर्मचारियों की टीम शिविर के अलावा हर घर में पहुंच रही है। खुद भी अपडेशन भी कर रही है। नगर निगम की जानकारी के अनुसार निगम के 48 वार्ड में आबादी 3.20 लाख है। इनमें से अब तक 1.63 लाख लोग की समग्र आईडी हो चुकी है। शेष 1.59 लाख आबादी की समग्र आईडी अपडेट नहीं हो पा रही है। इससे लोग जन्म प्रमाणपत्र से लेकर पेंशन जैसी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। इसे देखते हुए राज्य शासन के आदेश पर नगर निगम ने इस आईडी को अपडेट करने का बीड़ा उठाया है। अभी तक 48 वार्डो में हर जगह शिविर लगाए गए हैं। इसके अलावा दूरदराज के इलाकों में लोग मिल नहीं पा रहे हैं।

हर परिवार में समग्र आईडी अनिवार्य

प्रत्येक परिवार के प्रत्येक सदस्य की समग्र ई केवायसी होना अनिवार्य है। समग्र पोर्टल में दर्ज विभिन्न आईडी धारक समग्र ई केवायसी का कार्य नहीं करा रहे हैं। आमजन अपनी समग्र ई केवायसी वाडों के शिविर, एमपी ऑनलाइन, कियोस्क सेंटर, जोन कार्यालय, योजना कार्यालय अथवा स्वयं समग्र पोर्टल पर भी कर सकते हैं। जिन परिवार एवं सदस्यों की समग्र ई केवायसी नहीं हुई है, उनकी वार्डवाइज सूची निकाय की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

निगम की चेतावनी दिख नहीं रही गम्भीरता

निगम आयुक्त ने साफ चेतावनी दी है कि सात दिवस के बाद जिन सदस्यों ने अपनी समग्र आईडी की केवायसी नहीं कराई है, उन्हें क्षेत्र में निवासरत होना नहीं माना जाकर पोर्टल पर समग्र आईडी से हटा दिया जाएगा। इसके बाद भी आधी आबादी गम्भीरता नहीं दिखा रही है। इससे नगर निगम चिंतित है।

समग्र आइडी/इ-केवायसी में ये समस्याएं

  • जिन्हें किसी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा, वे कराने के इच्छुक नहीं।
  • समग्र पोर्टल ठीक ढंग से नहीं चल पा रहा है। इससे शिविर में आने वाले लोग लौट रहे हैं।
  • ज्यादातर लोगों के आधार कार्ड अपडेट नहीं है। इससे उनका मिलान नहीं हो पा रहा है।
  • कई किराएदारों की डबल आईडी जनरेट हो गई है। मोबाइल नंबर भी बदल गए हैं।
  • जिस समय समग्र आईडी बनी थी, उसमें काल्पनिक जानकारी भी भरी गई है। इसे ठीक कराने में लोगों की रुचि नहीं दिख रही है।