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Negligence: दुकानों में मिठाई को लेकर दो साल बना था यह सख्त नियम, फिर भी लोग हो रहे बीमार

अनदेखी कर धड़ल्ले से बासी मिठाई बेच रहे हैं।

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Negligence: दुकानों में मिठाई को लेकर दो साल बना था यह सख्त नियम, फिर भी लोग हो रहे बीमार

Negligence: दुकानों में मिठाई को लेकर दो साल बना था यह सख्त नियम, फिर भी लोग हो रहे बीमार

छिंदवाड़ा. मिठाई दुकानों में फूड सेफ्टी के नियम दरकिनार कर दिए गए हैं। मिठाई दुकानों में सजाकर रखी मिठाइयों में उसे सुरक्षित उपयोग की तारीख की जानकारी ग्राहकों को नहीं दी जा रही है। दुकानदारों नियमों की अनदेखी कर धड़ल्ले से बासी मिठाई बेच रहे हैं। बड़ी बात यह है कि वे मिठाई की ट्रे या पैकेट पर बेस्ट बिफोर डेट भी अंकित नहीं कर रहे हैं, जबकि दो साल पहले इसे अनिवार्य कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि इन दुकानों पर कार्यवाही करने वाले जिम्मेदार भी नदारद हैं। अन्जाने में लोग बासी मिठाई खरीद रहे हैं। उसे खाकर लोग बीमार पड़ रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन लोग अपच, पेट दर्द, दस्त और आंतों में संक्रमण की शिकायत लेकर आ रहे हैं। गुलाबरा निवासी राकेश प्रजापति ने बताया कि त्योहार के आते ही खाद्य सुरक्षा विभाग सक्रिय हो जाता है। दशहरा, दिवाली में हर जगह सेम्पल लिए जाते हैं और कार्यवाही की जाती है, लेकिन इसके बाद जिम्मेदार विभाग कार्यवाही करना भूल जाता है। ऐसे में हलवाइयों के हौंसले बुलंद हो जाते हैं। इस समय शहर में अधिकतर मिठाई दुकानों में नियम का पालन नहीं हो रहा है। शहर में हलवाई मिठाई में न तो बेस्ट बिफोर डेट दर्ज कर रहे हैं और न ही एक्सपायरी डेट का उल्लेख। जबकि मिठाई के उपयोग को सुरक्षित बनाने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मिठाई की ट्रे या पैकेट पर बेस्ट बिफोर डेट अंकित करना अनिवार्य किया था।


वर्ष 2020 में लागू हुआ था नियम
राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा को लेकर नियम, कानून लागू करने वाली संस्था भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने एक अक्टूबर 2020 से मिठाई के डिब्बों पर एक्सपायरी डेट या फिर बेस्ट बिफोर डेट लिखना अनिवार्य कर दिया है। कुछ दिन इस नियम का पालन शहर के मिठाई दुकानदारों ने किया। जिन्होंने नहीं किया उन पर खाद्य विभाग ने कार्यवाही की। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया और मिठाई दुकानदार मनमानी करने लगे। वर्तमान में हालत यह है कि अधिकतर दुकान एक्सपायरी डेट नहीं लिख रहे हैं।


कई लोगों को जानकारी ही नहीं
पत्रिका ने जब मामले की पड़ताल की तो कुछ दुकानदारों का कहना था कि उन्हें इसके बारे में पता ही नहीं है। हालांकि शहर में कुछ दुकानदारों ने कहा कि मिठाई ताजा है कुछ देर बाद पर्ची लगा देंगे।

जिले में 6 सौ से अधिक दुकान
जिले में लगभग छह सौ मिठाई की दुकान हैं। इसमें से महज 50 दुकानों में ही मिठाई की ट्रे या पैकेट पर बेस्ट बिफोर डेट अंकित किया जा रहा है। शेष दुकानदार नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।


होता है संक्रमण का खतरा
मेडिकल कॉलेज में पदस्थ एमडी मेडिसिन डॉ. संदीप जैन ने बताया कि मिठाई पुरानी होने पर उसमें फंगस होने लगती है। ऐसी मिठाई खाने पर संक्रमण का खतरा रहता है। ज्यादा पुरानी मिठाई के सेवन के बाद फरमेंटेंशन के दौरान शरीर में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। पेट, आंतों में समस्या हो सकती है। फूड प्वाइजनिंग की आशंका रहती है। बासी खाद्य सामग्री बच्चों को जल्दी नुकसान पहुंचाती है। उनकी इम्युनिटी कम होती है।

इनका कहना है...
दुकानों की समय-समय पर जांच की जाती है। समझाइश भी दी गई थी। अगर दुकानदार नियम का पालन नहीं कर रहे हैं जो जांच कर कार्यवाही की जाएगी।

पुरुषोत्तम भदौरिया, खाद्य सुरक्षा अधिकारी