
Orders given by the investigation committee for Rais Khan
छिंदवाड़ा/भोपाल. राज्य सरकार ने सोमवार को परासिया जनपद अध्यक्ष रईस खान का जाति प्रमाण-पत्र रद्द कर दिया। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के बाद कमलनाथ को झटका देने के लिए यह सियासी कदम बताया जा रहा है। हालांकि इस मामले में लम्बे समय से चार अफसरों की छानबीन कमेटी जांच कर रही थी, लेकिन इस कमेटी का निष्कर्ष अब आया है।
इस मामले में छिंदवाड़ा के ही देवेंद्र सूर्यवंशी ने शिकायत की थी। इसमें रईस खान द्वारा अपनी जाति मोमिन-जुलाहा होना बताकर अन्य पिछड़ा वर्ग में जाति प्रमाण-पत्र लेना गलत बताया गया था। इसमें यह तर्क दिया गया था कि रईस खान की जाति मुस्लिम है, जो कि अन्य पिछड़ा वर्ग में नहीं आती, जबकि मोमिन जुलाहा अन्य पिछड़ा वर्ग में आता है। इसकी जांच सरकार ने पिछड़ा वर्ग उच्च स्तरीय छानबीन समिति को दे दी थी। इसमें राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य सचिव किरण गुप्ता आयुक्त प्रतिनिधि के तौर पर और पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव रमेश थेटे और एमएस भलावी संचालक आदिम जाति अनुसंधान संस्थान जांच अधिकारी थे। सोमवार को इस कमेटी ने आदेश दिया कि रईस खान की जाति मोमिन जुलाहा होना नहीं पाई गई है। इसलिए 5 अक्टूबर 2005 को जारी जाति प्रमाण-पत्र अमान्य किया जाता है। इसमें रईस खान की ओर से तर्क दिया गया था कि मुसलमान इस्लाम को मानने वाला धर्म है और इसमें कई जातियां आती हैं। रईस खान ने शिकायत को चुनाव में हार के कारण बदले की कार्रवाई के तहत करना बताया गया था। छानबीन समिति ने इन तर्कों को खारिज करके जाति प्रमाण-पत्र को रद्द करने का फैसला दिया।
सियासी मायने
इस पूरे मामले को सियासत से जोडक़र देखा जा रहा है, क्योंकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भोपाल प्रवास के दौरान कहा था कि छिंदवाड़ा और गुना सीट की घेराबंदी करें। रईस खान को कमलनाथ के खास समर्थकों में माना जाता है। इस कारण इस प्रकरण में जाति प्रमाण-पत्र रद्द होने के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
Published on:
05 Sept 2017 11:48 am
बड़ी खबरें
View Allछिंदवाड़ा
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
