
MP News: मध्यप्रदेश के नए जिले पांढुर्ना (pandhurna) के बोरपानी गाँव में दूषित पानी पीने से 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग बीमार पड़ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का अमला बोरपानी गांव में डेरा डाले हुए हैं, उसने कैंप लगाकर कई लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इधर, इस घटना पर पूर्व सीएम कमलनाथ (kamal nath) ने चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से साफ जल उपलब्ध कराने को कहा है।
बताया जा रहा है कि बोरपानी गाँव के ट्यूबवेल का पानी पीने से एक के बाद एक लोग बीमार पड़ने लगे। इस दौरान ज्यादा हालात बिगड़ने के कारण दो लोगों की मौत हो गई। जबकि 32 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाया है, जहां हर घर के लोगों की जांच की जा रही है। बुधवार शाम तक 140 से अधिक लोगों का परीक्षण किया जा चुका है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उन्हें मंगलवार रात करीब 20 लोगों की एक साथ उलटी-दस्त से तबीयत बिगड़ने की खबर मिली थी। खबर मिलने के बाद टीम ने पांढुर्ना के सिविल अस्पताल में सुबह 7 बजे तक पीड़ितों का उपचार किया। इलाज़ के दौरान 2 लोगों की मौत हो गई, जिनके नाम देवाची उइके और झनकाबाई धुर्वे है। शिविर में 32 लोग बीमार मिले, जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है।
गांव के लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले ही वहां एक ट्यूब वेल से दूषित पानी निकलने की बात सामने आई थी, लेकिन कुछ लोगों ने ध्यान नहीं दिया और पानी का सेवन कर लिया, जिसके कारण उन्हें उल्टी दस्त की समस्या शुरू हो गई।
बुधवार को पांढुर्ना के कलेक्टर अजय देव शर्मा और एसपी राजेश कुमार त्रिपाठी भी बोरपानी गांव पहुंच गए थे। उन्होंने सिविल अस्पताल में बीमार व्यक्तियों से मुलाकात की है और बीमार लोगों को सरकार की तरफ से 5-5 हजार की तत्काल सहायता राशि देने की घोषणा की है।
पांढुर्ना कलेक्टर ने यह भी घोषणा की है कि बीमार व्यक्तियों को रेडक्रॉस की तरफ से 25 हज़ार रुपयों का चेक मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ट्यूबवेल और गाँव सप्लाई हो रहे पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेज दिए है।
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा है कि पांढुर्णा जिले के बोरपानी गांव में दूषित पानी से दो लोगों की मृत्यु होने एवं 30 लोगों के अस्वस्थ होने की घटना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने आगे मृतकों को श्रद्धांजलि हुए लिखा कि ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दें, बीमार लोगों के स्वस्थ होने की प्रार्थना है। कमलनाथ ने अंत में प्रशासन से आग्रह किया कि उन्हें इलाक़े में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
नीति आयोग की समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (CWMI) रिपोर्ट 2018 के मुताबिक पीने का साफ़ पानी न मिलने के काऱण हर साल लगभग दो लाख लोगों की जान चले जाती है। नीति आयोग की इसी रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक लगभग 600 मिलियन लोगों को जल तनाव का सामना करना पड़ सकता है, जो भारत की अनुमानित आबादी का लगभग 40% होगा। लैंसेट के एक अध्ययन के अनुसार, देश में 1,95,813 बस्तियों में पानी की गुणवत्ता खराब है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है। अध्ययन में दावा किया गया है कि भारत में प्रदूषण के कारण 2019 में 2.3 मिलियन से अधिक असामयिक मौतें हुईं, जिसमें से लगभग 1.6 मिलियन मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुईं और पाँच लाख से अधिक मौतें जल प्रदूषण के कारण हुईं।
Updated on:
28 Aug 2024 06:52 pm
Published on:
28 Aug 2024 06:44 pm
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