
Paryushan parv: सरल व्यक्ति के हृदय में प्रवेश करता है आर्जव धर्म
छिंदवाड़ा. दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन रविवार को मुमुक्षु मण्डल एवं अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के श्रावक-श्राविकाओं ने श्री आदिनाथ जिनालय एवं श्री पाश्र्वनाथ जिनालय में उत्तम आर्जव धर्म की पूजन कर श्री सुपाश्र्वनाथ भगवान का मंगलकारी गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया। स्वाध्याय भवन में गुरुदेवश्री ने मोक्ष मार्ग का स्वरूप बताते हुए कहा कि हम कितनी ही भक्ति, व्रत आदि कर लें, जब तक आत्मा का अनुभव नहीं होगा तब तक मोक्ष की सिद्धि नही होगी। द्रव्य स्वभाव में एकत्व करना, द्रव्य स्वभाव पर दृष्टि देकर पर्याय का लक्ष्य छोड़ देना, यही सुख का कारण है। बीना से पधारे पं. सुदीप कुमार जैन ने कहा कि ज्ञान एवं सुख का अविनाभावी संबंध है। द्वेष रूप परिणाम एवं इंद्रिय विषयों में आसक्ति, यह अशुभ उपयोग का लक्षण है। पंचम गुणस्थान वर्ती जीवों को प्रत्येक समय सांसारिक कार्यों को करते हुए भी धर्मनुराग चलता रहता है। सरल व्यक्ति के हृदय में ही उत्तम आर्जव धर्म का प्रवेश होता है। इंदौर से पधारे अक्षत शास्त्री ने कहा कि सरलता का नाम ही आर्जव है। आर्जव धर्म की विरोधी माया कषाय है। कुटीलता का अर्थ माया है। सम्यक दर्शन के साथ होने वाली सरलता ही सच्चा उत्तम आर्जव धर्म है। कमजोर व्यक्ति ही छल कपट करता है। आत्मा का जैसा स्वभाव है उसे वैसा मानना ही निश्चय से आर्जव धर्म है। यह आर्जव धर्म हम सबके जीवन में प्रगट हो यही मंगल भावना है।
Published on:
13 Sept 2021 12:41 pm
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