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Patrika Campaign: भरे सभागार में सबको बनाकर दिखाई गणेश प्रतिमा और फिर की अपील

पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है।

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Patrika Campaign: भरे सभागार में सबको बनाकर दिखाई गणेश प्रतिमा और फिर की अपील

Patrika Campaign: भरे सभागार में सबको बनाकर दिखाई गणेश प्रतिमा और फिर की अपील


छिंदवाड़ा. गणेश चतुर्थी 31 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन घर पर भगवान गणपति की मूर्ति स्थापित की जाती है। हालांकि बीते कई वर्षों से देखने में आ रहा है भक्त पीओपी की बनी प्रतिमा की स्थापना घरों में कर रहे हैं और तालाब, नदियों में विसर्जन करते हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है। बप्पा का अपमान भी हो रहा है। इसकी वजह यह है कि पीओपी से बनी प्रतिमा पानी में घुलती नहीं है। ऐसे में पत्रिका लोगों को ‘घर-घर सृजन, घर-घर विसर्जन’ अभियान के अंतर्गत जागरूक कर रहा है। मिट्टी की प्रतिमा ही घर पर स्थपित करने को प्रेरित कर रहा है। इसी कड़ी में रविवार को एमएलबी स्कूल में बीएसडब्ल्यू, एमएसडब्ल्यू विद्यार्थियों के बीच कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छापाखाना निवासी मूर्तिकार विजय मालवी ने विद्यार्थियों को लाइव डेमो देकर मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने की विधि समझाई। कार्यक्रम के आयोजन में जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक पवन सहगल, ब्लाक समन्वयक अखिलेश जैन, समाजसेवी विनोद तिवारी, डॉ. चन्द्रकांत विश्वकर्मा, मनीष तिवारी, डीएस चौरे, महेश बंदेवार, लता नागले सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को संकल्प भी दिलाया गया।

ऐसे बनाएं मिट्टी की गणेश प्रतिमा
गणेश चतुर्थी के दिन मिट्टी के गणेश जी स्थापित करना चाहिए, क्योंकि मिट्टी में स्वभाविक पवित्रता होती है। घर पर मिट्टी के गणपति बनाना बेहद आसान है और यह बेहद शुभ भी है। मिट्टी के गणेश जी बनाने के लिए साफ जगह की मिट्टी को इक_ा करें और उसे साफ जगह पर रखें। मिट्टी से कंकड़, पत्थर, घास निकाल कर अलग रख दें और उसे अच्छे से छान लें। अच्छी और मुलायम मिट्टी का ही इस्तेमाल करें। मिट्टी में हल्दी, घी, शहद, गाय का गोबर और पानी मिलाकर सान लें। मंत्र बोलते हुए गणेशजी की सुन्दर मूर्ति बनाएं। पहले अलग-अलग आकार में मिट्टी के छोटे-बड़े गोले तैयार करें। इनमें से एक गोले को चपटा आकार देकर गणेशजी का आसन बनाएं। पेट बनाने के लिए बड़ी लोई लें। फिर मिट्टी की चौकोर प्लेट को टेढ़ा करके मुकुट का आकार दें। मान्यता है कि ऐसी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करने से उसमें भगवान का अंश आ जाता है।