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Railway: रेल यात्रियों के लिए तीन साल पहले शुरु हुई थी यह सेवा, बहुत कम लोगों को है जानकारी

यात्रियों तक पहुंचने से पहले ही कही विलुप्त हो गई।

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Indian Railways To Run Unreserved Trains Between Bihar-UP From September 1st

छिंदवाड़ा. रेलवे द्वारा समय-समय पर भले ही यात्रियों की सुविधा के लिए नई योजनाएं शुरु की जाती है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यह योजनाएं कुछ ही दिन में दम तोड़ जाती है। वर्ष 2018 में छिंदवाड़ा में शुरु की गई योजना यात्रियों तक पहुंचने से पहले ही कही विलुप्त हो गई। बड़ी बात यह है कि जिम्मेदार रेलवे अधिकारी योजना को यात्रियों तक पहुंचाने में भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। गौरतलब है कि 25 जून 2018 में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नागपुर मंडल द्वारा मोबाइल से अनारक्षित टिकट सेवा शुरु की गई थी। शुरुआत में रेलवे के संबंधित विभाग ने जमकर इस सेवा का प्रचार-प्रसार किया। स्टेशन पर आने वाले हर यात्री को जानकारी दी, लेकिन कुछ दिन बाद ही प्रचार-प्रसार थम गया। यात्री भी भूल गए। इसके बाद धीरे-धीरे इस सुविधा से न सिर्फ यात्री बल्कि रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी भी दूर हो गए। इस सेवा को शुरु करने के पीछे रेलवे की मंशा यात्रियों को लंबी लाइन से मुक्ति दिलाना था। वहींअगर यात्री इस योजना का लाभ लेते तो डिजीटल भारत बनाने में सहयोग भी होता। कोरोना वायरस से लडऩे में सहायता भी मिलती। इस सेवा से यात्रियों को समय की बचत के साथ वॉलेट रिजार्ज करने पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त बोनस, पर्यावरण संरक्षण में मदद, अपना टिकट अपने हाथ बनाने की सुविधा भी मिल रही है। यात्री मोबाइल एप के माध्यम से अनारक्षित टिकट के अलावा एमएसटी, प्लेटफॉर्म टिकट भी बनवा सकते हैं।


इंटरचेजिंग जोनल प्वाइंट समस्या
इस योजना के परवान न चढऩे के पीछे एक वजह छिंदवाड़ा का इंटरचेजिंग जोनल प्वाइंट भी है। दरअसल उस समय छिंदवाड़ा से भोपाल, इंदौर, दिल्ली सहित अन्य जगहों के लिए ट्रेन चलती थी। जिसमें जनरल टिकट भी बुक होता था। मोबाइल पर ऐप डाउनलोड करने के बाद यात्री जब भोपाल का टिकट बनवाते थे तो कुछ भी शो नहीं होता था और पैसे भी कट जाते थे। ऐसा रेलवे जोन बदलने की वजह से होता था। हालांकि बुकिंग काउंटर पर कर्मचारियों का कहना है कि दूसरे जोन का मोबाइल पर टिकट बनाने पर अनारक्षित टिकट काउंटर पर अपना मोबाइल नंबर बताकर टिकट का प्रिंट आउट लिया जा सकता है। इसमें कोई भी शुल्क नहीं देना है। दरअसल छिंदवाड़ा आउटर से परासिया की तरफ रेल यात्रा करने पर रेलवे का जोन बदल जाता है। मोबाइल ऐप में केवल दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नागपुर मंडल की तरफ जाने वाले ट्रेन के पेपर रहित टिकट ही छिंदवाड़ा से मोबाइल एप के माध्यम से मिलता है। हालांकि बताया जाता है कि जल्द ही पूरे देश में यह सुविधा शुरु की जाएगी। जिससे कोई भी यात्री कही का भी टिकट मोबाइल के माध्यम से बनवा सकता है।

कैसे उठा सकते हैं इस सेवा का लाभ
1. अनारक्षित पेपर रहित टिकट लेने के लिए यात्री को एंड्रायड मोबाइल से यूटीएस अप्लीकेशन डाउनलोड करना होगा। इसके लिए आपको प्ले स्टोर से यूटीएस अप्लीकेशन को
www.utsonmobile.indianrail.gov.in से डाउनलोड कर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूर्ण करना है। रजिस्टर होने के लिए केवल एक बार साइनअप करना होगा। साइनअप करने के लिए यात्री को अपने मोबाइल पर सभी चाही गई जानकारी एवं ओटीपी जनरेट करना है। इसके पश्चात टिकट का विवरण दर्ज करना है। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर लॉगिन के समय पासवर्ड प्राप्त होगा जो हर समय लागइन के लिए आवश्यक है। एप में लॉगिन करने के बाद यात्री को मोबाइल की स्क्रीन पर दिए पेपरलेस टिकट विकल्प का चयन करना होगा। आप अपने मोबाइल पर अनारक्षित टिकट काउंटर से एक से दस हजार रुपए तक का रिचार्ज करा सकते हैं। इसके अलावा के्रडिट कार्ड एवं अन्य माध्यम का भी प्रयोग कर मोबाइल से टिकट प्राप्त कर सकते हैं।


अधिकतम पांच किमी दूरी निर्धारित
मोबाइल से टिकट बुक करने के लिए यात्री को रेलवे स्टेशन से अधिकतम पांच किमी एवं कम से कम 25 मीटर की दूरी होनी आवश्यक है। यात्रा का शुभारंभ टिकट क्रय करने के तीन घंटे के अंदर करना होगा।

इनका कहना है...
मोबाइल से अनारक्षित टिकट सेवा को लेकर प्रचार-प्रसार किया गया था। यात्री लाभ भी ले रहे हैं। अधिक से अधिक यात्री लाभ लें इसके लिए फिर से प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
अजीत कुमार, रेलवे कामर्शियल इंस्पेक्टर, छिंदवाड़ा