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छिंदवाड़ा. जिले में रंगमंच का इतिहास पुराना है। आजादी की बात हो या फिर समसामयिक विषयों पर नाट्य मंचन से लोगों को जागरूक करने की बात या फिर विभिन्न नाटकों एवं कहानियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की बात। हर जगह छिंदवाड़ा के रंगकर्मियों ने अपना सशक्त अभिनय दिखाकर कर प्रतिभा का लोहा मनवाया है। हालांकि वर्षों से कलाकार मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन इसका प्रतिसाद नहीं मिल पा रहा है। सरकार रंगकर्मियों को बढ़ावा देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। रंगकर्मियों का कहना है कि मुख्यालय में रंग भवन की जरूरत है। वर्षों से मांग हो रही है, लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही। अगर रंग भवन बन जाता तो कलाकार अभ्यास करते। इसके अलावा समय-समय पर रंगकर्मियों को दर्शकों को प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता। सबसे बड़ी बात यह है कि रंगमंच आत्मविश्वास बढ़ाता है, इंसान बनाता है और जीने का तरीका सिखाता है। ऐसे में और जरूरी हो जाता है कि छिंदवाड़ा में रंगमंच को बढ़ावा देने के लिए सशक्त कदम उठाया जाए। शासन रंगकर्मियों को बढ़ावा दे तो निसंदेह हम परचम लहराएंगे।
130 वर्षों से अधिक का है इतिहास
वरिष्ठ रंगकर्मी विजय आनंद दुबे ने बताया कि छिंदवाड़ा जिले में रंगकर्म का इतिहास 130 वर्ष से अधिक का है। सार्वजनिक श्री रामलीला मंडल द्वारा छोटी बाजार में 133 वर्षों से श्री रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
बुजुर्गों के अनुसार अयोध्यापुरी से श्रीरामदास चौबे बाबा छोटी बाजार आते थे। स्थानीय लोगों को उन्होंने प्रेरित किया कि श्रीरामलीला का मंचन किया करो। उन्हीं की प्रेरणा से मंचन शुरु हो गया। वहीं से छिंदवाड़ा में रंगमंच की शुरुआत हो गई। वहीं अंचल में नकलाकार रूप धरके कलाकार अभिनय कर विभिन्न समस्याओं को उजागर करते थे। वर्ष 1940-42 के समय जनजागरण हेतु आजादी के संघर्ष के लिए चौराहों, गांवों में नाट्य मंचन होने लगे। इलाहाबाद, बनारस, मथुरा सहित अन्य जगहों से नाटक मंडली भी आकर धार्मिक प्रस्तुति देती थी। उससे लोग प्रभावित होते थे और लोगों का रूझान रंगकर्म के क्षेत्र में बढ़ता चला गया। सन 1979 में अभिनय सांस्कृतिक मंच का प्रादूर्भाव हुआ। छिंदवाड़ा के एमआई खान, जयश्री रामेकर, अनसुइया उइके, कंचन बैस, बसंत सिंह ठाकुर, अरविंद रंजन कुंडू, विजय आनंद दुबे आदि लोगों ने थियेटर को स्थापित किया। तब से लेकर अब तक विभिन्न संस्था सृजन, आरती जन नाट्य संघ, संस्कार भारती, नाट्यगंगा, ओम मंच पर अस्तित्व, एस थ्री एम जैसी कई संस्थाएं रंगमंच के क्षेत्र में काम कर रही है।
इनका कहना है...
छिंदवाड़ा में रंगकर्म का इतिहास बहुत पुराना है। आजादी के 75वर्ष बाद भी छिंदवाड़ा में एक सांस्कृतिक भवन उपलब्ध नहीं हो पाया है। जबकि मध्यप्रदेश के बड़े महानगरों में छिंदवाड़ा का भी नाम है।
विजय आनंद दुबे, वरिष्ठ रंगकर्मी
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ऑडिटोरियम का बड़ा अभाव है। हर नाट्य मंचन के पहले सबसे बड़ी चिंता इस ही बात की होती है कि मंचन करेंगे कहां। शहर के सांस्कृतिक विकास को हमेशा उपेक्षित किया जा रहा है जो चिंतनीय है ।
सचिन वर्मा, वरिष्ठ रंगकर्मी
छिंदवाड़ा में रंगकर्म अन्य जिलों की तुलना में काफी बेहतर रहा है एवं देश के बड़े शहरों में ख्याति प्राप्त कर रहा है। छिंदवाड़ा में अब तक ऑडिटोरियम नही बन पाया है। इसकी काफी आवश्यकता है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
पवन नेमा, वरिष्ठ रंगकर्मी
Published on:
27 Mar 2023 04:31 pm
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