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Solar energy: लगातार खत्म हो रहा कोयला, अब वैकल्पिक स्रोतों पर देना होगा जोर

- जिले की 70 कोयला खदानों में 10 से कम संचालित - गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों की श्रेणी में सर्वोत्तम है सौर ऊर्जा

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coal In chhindwara

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आगामी समय में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का भंडार लुप्त हो जाएगा। जिले में ही 70 कोल खदानों में से वर्तमान में 10 से भी खदानें संचालित हैं। कोयले और पानी से बिजली बनाई जाती है और बिजली से विद्युत उपकरण चलते हैं। यदि इन दोनों ऊर्जा स्रोतों से पर संकट आया तो सब कुछ वहीं थम जाएगा। ऐसे में ऐसे में सरकार ने रूफटॉप सोलर पैनल से बिजली पैदा करने की तैयारी की है। पहले तो यह बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया।
अब सरकार घर की छत को ही बिजली पैदा करने का जरिया बना रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना लागू की जा चुकी है। इसमें घर की छतों में सोलर पैनल लगाकर एक किलोवाट या उससे अधिक बिजली पैदा की जा सकती है। महंगे सोलर पैनल के कारण सरकार 30 हजार रुपए से लेकर 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी दे रही है। योजना के लिए बैंक लोन का भी प्रावधान है।

यह है योजना, ऐसे करना होगा आवेदन

यह योजना मुख्यत: मकान मालिकों के लिए है। किराएदार के लिए मकान मालिक की अनुमति एवं सहमति जरूरी है। योजना का आवेदन सूर्या घर ऐप एवं स्मार्ट बिजली ऐप के माध्यम से किया जा सकता है। आवेदन करते समय पहचान प्रमाण पत्र यानी आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि, निवास प्रमाण पत्र राशन कार्ड, बिजली बिल आदि दस्तावेजों की जरूरत होती है। आवेदन करने के बाद निजी सोलर वेंडर आवेदनकर्ता से सम्पर्क करते हैं और उन्हें समस्त जानकारी देते हैं। बिजली कंपनी की भूमिका नेटमीटर लगाने की होती है, जिससे दिन में सोलर एवं रात में बिजली कंपनी के ग्रिड की बिजली के खपत की जानकारी दर्ज होती रहेगी।

कुछ सालों में बंद हो चुकी कई खदानें

जिले में 70 से अधिक कोयला खदानें गिनी जाती हैं। इनमें काफी खदाने लंबे समय से बंद हैं। ज्यादातर के नाम भी लोगों के जहन में नहीं हैं। हाल ही में एक दो साल पहले कन्हान क्षेत्र की मोआरी एवं तानसी खदान बंद हो गई, जबकि भवानी, नंदन, झरना आदि खदानें पांच साल से अधिक समय से बंद है। बताया जा रहा है कि इन खदानों के संचालन से वन एवं पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था। अधिकारियों की मानें तो इन खदानों से 25-30 साल तक कोयला निकल सकता है। जिले में फिलहाल शारदा प्रोजेक्ट, धनकशा, उरधन, महादेवपुरी, छिंदा सहित करीब आधा दर्जन खदानों से बड़े पैमाने पर कोयला हर दिन निकाला जा रहा है।

इन उपभोक्ताओं ने बताए अपने अनुभव

पातालेश्वर रहवासी नरेंद्र माहोरे ने जनवरी में पांच किलोवाट का सोलर पैनल इंस्टॉल करवाया। उन्होंने बताया कि पहले हर माह औसतन पांच हजार रुपए बिजली बिल आ जाता था। अभी 6 माह बाद बिजली कंपनी पर ही 120 यूनिट पर है। तीन लाख रुपए खर्च हुआ, वह बैंक से लोन मिल गया। अब किस्त बनी है। जमा की गई नकद राशि सरकार ने सब्सिडी के रूप में लौटा दी। जबकि वार्ड 13 के नई आबादी के रहवासी मोहित गौरी ने बताया कि उन्होंने छह किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया। गुडविल में सोलर पैनल लगाने वाली कंपनी को कुछ किस्तों में भुगतान कर दिया, अब प्रत्येक माह लगने वाले 3000 रुपए बिजली बिल से निजात मिल चुकी है।

इनका कहना है
पिछले कुछ साल में छिंदवाड़ा, खरगोन सहित कुछ जिलों में 70 से अधिक सोलर रूफटॉप इंस्टाल कर चुके हैं। सरकारी सब्सिडी के साथ-साथ अब तो बैंक से भी सात प्रतिशत ब्याज दर में लोन मिल रहा है। दो किलो वाट एवं उससे अधिक क्षमता का सोलर पैनल लगाना अधिक फायदे मंद है।
शशिकांत कड़वे, सोलर वेंडर