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Whether: मौसम का असर इस बार अमराईयों पर भी

पेड़ों में कम दिख रहे हैं बौर

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Whether: मौसम का असर इस बार अमराईयों पर भी

Whether: मौसम का असर इस बार अमराईयों पर भी

छिंदवाड़ा. अनियंत्रित और अनियमित मौसम की मार अब मौसमी फसलों और फलों पर भी पड़ रही है। इन्हें फलने फूलने के लिए मौसम का नियंत्रण जरूरी है लेकिन इस साल मौसम की अनिश्चितता ज्यादा देखी गई है। यही कारण है कि उत्पादन पर प्रभाव दिख रहा है। गर्मी में फलों के राजा आम की सुगंध और स्वाद के सभी कायल होते हैं। इस बार भी अमराईयों में बौर दिख रहे हैं लेकिन बहुत कम। इससे इन पेड़ों में आम भी कम आने की आशंका है। होली के पहले जंगलों, सडकों के किनारे लगी अमराईयों और बगीचे बौर से लद जाते हैं। इस बार आम के पेड़ों में बौर कम दिख रहे हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि देसी आम का स्वाद इस बार लोगों को कम चखने को मिलेगा।
कई किस्में होती है जिले में
जिले में मीडियम आकार का देसी आम अपने मीठे स्वाद के लिए खासा प्रसिद्ध है। पगारा का आम तो नाम से बिकता है। इसके अलावा किसान अपने खेतों में भी आम के बगीचे लगाते हैं इनमें देसी के अलावा दशहरी, लंगड़ा आदि किस्में भी लगाई जाती है। सबसे ज्यादा मांग छोटी गुठली वाले चूसने वाले देसी आमों की होती है। हालांकि समय रहते अब ये देसी किस्में धीरे-धीरे कम होती जा रही है। इसका बड़ा कारण निर्माण कार्यों के कारण अमराईयों का काटा जाना भी है। इस बार नवंबर दिसंबर तक हुई बारिश और उसके बाद ठंड के मौसम में उतार चढ़ाव वाले दिनों के कारण आम के पेड़ों में बौर जिस तरह से आने थे वे नहीं दिख रहे हैं। उद्यान विभाग की नर्सरियों में भी कम बौर जिले में उद्यानिकी विभाग भी अपनी नर्सरियों में आम की विभिन्न किस्में लगाता है। जिले की जमुनिया, देलाखारी नर्सरी में सबसे ज्यादा आम के पड़े लगाए गए हैं। यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, बाम्बेगिरी आदि वेरायटी आती है। सबसे ज्यादा डिमांड दशहरी और लंगड़े किस्म के आमों की रहती है। यहां की नर्सरी के आम बेहद मीठे रहते है। हर साल विभाग इन आम के बगीचों की नीलामी भी करता है।
उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक एमएल उइके ने बताया कि इस बार नर्सरियों में भी पेड़ों पर बौर कम दिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि उक्त दोनों नर्सरियों में लगभग तीन सौं पेड़ लगे है। इसके अलावा जामई, बरघिया, हर्रई की नर्सरियों में भी विभाग आम के पेड़ लगा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता ही इसका कारण है। वैसे उन्होंने उम्मीद जताई है कि कुछ कम ही सही लेकिन स्थानीय आम का स्वाद जिलेवासी इस बार भी ले सकेंगे।