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ऑफिस में टपक रही छत तो बंगला,आवास में दीमक और रिसती दीवार

बारिश में अंग्रेजों के जमाने की सरकारी बिल्डिंग भी हो सकती है धराशायी

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ऑफिस में टपक रही छत तो बंगला,आवास में दीमक और रिसती दीवार

ऑफिस में टपक रही छत तो बंगला,आवास में दीमक और रिसती दीवार

छिंदवाड़ा. मानसूनी बारिश आते ही शहर समेत जिले में मौजूद जर्जर सरकारी ऑफिस एवं बंगले-क्वाटर्स की बदहाली का मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है। जिला मुख्यालय में तहसील, राजस्व अभिलेखागार और शहरी विकास परियोजना औ कलेक्ट्रेट बिल्डिंग मरम्मत के भरोसे चल रही है तो सिविल लाइन स्थित बंगले और कर्मचारी क्वाटर्स दीमक, सड़ी-गली छत एवं दीवार से अपनी व्यथा सुनाते नजर आते हैं। ये बिल्डिंग भी कहीं न कहीं हादसे का सबब बन सकती है। इसका मेंटेनेंस और सुधारीकरण पीडब्ल्यूडी नहीं करा पा रहा है। यह भी दुर्भाग्य है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी नए बिल्डिंग का प्रस्ताव तैयार नहीं कर पा रहे हैं। इस पर सरकार की स्वीकृति लेने के प्रयास भी नहीं हो पा रहे हैं।
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मेंटनेस शाखा में हर दिन शिकायतें
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पीडब्ल्यूडी मेंटेनेंस शाखा के पास कलेक्टर बंगले से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी क्वाटर्स तक के 58 रहवासों के रखरखाव की जिम्मेदारी है। इसके कर्मचारी हमेशा परेशान नजर आते हैं। उनके पास हर दिन अंग्रेजों के जमाने के बंगलों की बल्लियां सडऩे और दीमक से चरमराकर गिरने या फिर छतें टपकने की खबर पहुंचती है। इसके अलावा कोई न कोई कर्मचारी दीवार गिरने या फिर मेंटेनेंस के लिए फोन कर देता है।
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कहीं की सीमेंट तो कहीं रेत से मरम्मत
पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों की मानें तो बंगले सुधारने के लिए उनके पास कोई बजट नहीं होता। कहीं की रेत, सीमेंट के जुगाड़ तकनीक से कभी किसी को संतुष्ट कर देते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ये आवास इतने जर्जर हो चुके हैं, हमेशा ही हादसे का डर बना रहता है। विभागीय अधिकारियों को कई बार इससे अवगत कराया जा चुका है।
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पुराने जमाने के कवेलू आना बंद
अंग्रेजी हुकूमत के बंगलों में जिस हिसाब के कवेलू लगते हैं, उसका निर्माण बालाघाट में बंद हो चुका है। इसके अभाव में अधिकांश बंगलों में प्लास्टिक की पन्नियां लगानी पड़ी हैं। इन पन्नियों में बरसाती पानी टपकता भी है तो अधिकारी पीडब्ल्यूडी पर हुक्म चला नहीं पाते हैं।
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कई टाइप के कर्मचारी रहवास
पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों की मानें तो कलेक्टर बंगले को कोई नम्बर नहीं दिया गया है तो राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ईएसी-वन में रहते हैं। इसके बाद अधिकारियों-कर्मचारियों के एफ-वन से लेकर एफ-इलेवन और फिर आई और एस टाइप के रहवास है, जिनके लिए अधिकतम एक हजार रुपए तक सरकारी किराया निर्धारित है।
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अंग्रेजों के जमाने की बिल्डिंग
कलेक्ट्रेट परिसर में तहसील, शहरी विकास परियोजना कार्यालय, पटवारी भवन भी 50 वर्ष से अधिक पुराना होने से जर्जर हो गया है। अंग्रेजों के जमाने का पुराना जनसंपर्क कार्यालय में राजस्व अभिलेखागार की बिल्डिंग में कुछ सुधार किया गया है। फिर भी इर दफ्तरों में काम कर रहे कर्मचारियों को पूरी बारिश हादसे का डर सताता है।
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इनका कहना है...
कलेक्ट्रेट समेत अन्य विभाग अपनी बिल्डिंग के मेंटनेंस के लिए खुद जिम्मेदार है। सिविल लाइन समेत अन्य बंगले और क्वाटर्स का मेंटनेंस पीडब्ल्यूडी करा रही है।
-आसिफ मंडल, कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी।