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ईमानदार किसानों के डिफाल्टर होने का खतरा, जानें वजह

समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू नहीं होने के कारण और परेशानी

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छिंदवाड़ा. इन दिनों प्रदेश सहित जिले के वे किसान परेशान हैं जिन्होंने बैंक का कर्ज समय पर पटा दिया था और गेहूं चना के साथ अन्य फसलों के लिए अल्पकालीन ऋण लिया था। उन्हें मार्च की आखिरी तारीख तक ऋण चुकता करना था। सरकार ने मार्च की तारीख बढ़ाकर 15 जून तक ऋण भुगतान की तारीख उन किसानों की कर दी है जिन्होंने समय पर बैंक का पैसा जमा नहीं कराया और वे जय किसान ऋण माफी योजना में शामिल हो गए। जिले के जो ईमानदार किसान हैं उनपर डिफाल्टर होने का खतरा बन रहा है क्योंकि समर्थन मूल्य पर खरीदी इस बार देर से शुरू हो रही है। मेपिंग के काम में देरी के कारण ऐसा हुआ है। किसान यदि उपज बेच देते तो तीन चार दिन में प्रक्रिया के बाद उनका जो भुगतान बनता उसमें से ऋण चुकता कर वे शून्य प्रतिशत पर फिर से ऋण लेते, लेकिन समय बीत जाने के बाद उनके डिफाल्टर होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसा हुआ तो उन्हें शून्य प्रतिशत पर ऋण बैंक से मिल नहीं मिल पाएगा। किसानों का कहना है कि जो किसान समय पर ऋण भुगतान कर रहे हैं, उनके लिए भी ऋण अदायगी की तारीख बढ़ानी चाहिए थी।
आयुक्त सहकारिता और पंजीयक सहकारी संस्थाएं कार्यालय से जो पत्र भेजा गया है उसमें ये साफ लिखा है कि ड्यू तारीख में वृद्धि का लाभ सिर्फ योजना में ऋण माफी के लिए पात्र पाए गए किसानों को मिलेगा। इस बार समर्थन मूल्य पर खरीदी में नई तकनीकी व्यवस्थाओं के कारण देरी हो रही है। खरीदी 25 मार्च से प्रदेश में शुरू हो गई है। जिले में चार दिन बाद भी पोर्टल पर समितियों को चढ़ाने का काम पूरा नहीं हुआ है। इसलिए किसानों को एसएमएस भी नहीं भेजे गए है।

अधिकारियों के पास भी नहीं है जवाब

किसानों का कहना है कि हर वर्ष गेहूं की फसल उपार्जन केंद्रों में बेचकर अपना कृषि ऋण 28 मार्च के पहले सहकारी समितियों को अदा करते रहे हैं। इस साल तो वे भी डिफाल्टर की श्रेणी में आ सकते हैं। उनकी फसल नहीं बिकी तो वे पैसा कहां से अदा करेंगे। व्यवस्थाओं में देरी और सरकार का ईमानदार किसानों के साथ इस तरह के व्यवहार को लेकर किसानों में नाराजगी भी देखी जा रही है। सम्बंधित विभागों के अधिकारी भी इस सम्बंध में कुछ कहने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि हमारे पास जो पत्र आया है जो निर्देश भोपाल से मिलते हैं हम तो उसी का पालन कर रहे हैं।