छिंदवाड़ा. जीवन में कर्मो के बंधन से यदि मुक्ति पाना है तो पहले आस्रव के खेल को छोडऩा पड़ेगा। यह बात मुनि सुप्रभ सागर ने गुलाबरा स्थित ऋषभ नगर में कही। उन्होंने समाधि प्राप्त करने पर विस्तार से बताया। मुनिश्री ने कहा कि अनुपे्रक्षा समझकर अपने परिणाम को बनाना और समाधि प्राप्त करना। समाधि के लिए ममता का त्याग है और समता को दृढतापूर्वक ग्रहण करना पड़ेगा। यहां बाहुबल और भुजबल काम नहीं आता आत्मबल और पुण्यबल चाहिए।
जहां यह दो बल नहीं है वहां समाधि करना और कराना विफल होगा। उपाधि का त्याग कर समाधि को ग्रहण करना है क्योंकि उपाधि के लिए समाधि नहीं ली जाती और जो उपाधि के मद में रहता है वह समाधि प्राप्त नहीं कर सकता। जीवन में आधि व्याधि तो लगी रहेगी लेकिन उपाधि का रोग कभी मत लगाना। उन्होंने कहा कि उपाधि के समाधि व्रत मत लेना समाधि उपाधि नहीं है यह व्याधि उपाधि से छूटने की परमबोधि है।