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नगर निगम में कांग्रेस-भाजपा परिषद के तीन साल,हमेशा बजट का संकट, प्लान से नहीं दिखा काम

सत्ता परिवर्तन पर भी नहीं बदले हालात, बार-बार सरकार से जरूरी खर्च राशि मांगने की जरूरत

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Nagar nigam

नगर निगम में कांग्रेस और भाजपा की सत्ता के तीन साल हो गए है। अभी तक पार्षदों की अपने क्षेत्र के विकास की मांग पूरी नहीं हो सकी है। कांग्रेस राज में आर्थिक हालात खराब थे, कर्मचारियों को वेतन का रोना था। भाजपा के राज में चुंगी क्षतिपूर्ति राशि नहीं मिल रही है। हालत यह है कि नगर निगम को खुद टैक्स संग्रहण कर कर्मचारियों का वेतन करना पड़ रहा है।
पिछले साल महापौर विक्रम अहके समेत १३ पार्षद व सभापतियों ने लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़ भाजपा की सदस्यता ली थी। तब ये उम्मीद थी कि निगम के सारे वित्तीय संकट हल होंगे। चुंगी क्षतिपूर्ति राशि मिलेगी। वार्ड में सडक़, नाली, पुलिया समेत अन्य निर्माण कार्य की राशि मिलेगी। हालत यह है कि अभी भी राशि उपलब्ध नहीं हो पा रही है।


आवश्यक भुगतान करने बजट का टोटा


पिछले साल २०२४ में एमआईसी की बैठक में निगम अधिकारियों ने ये स्वीकार किया कि नगर पालिक निगम के आकस्मिक कार्य जैसे फायर, जल प्रदाय, मरम्मत संधारण अंतर्गत वाटर फिल्टर प्लांट (कुलबहरा, अजनिया, जम्होडी पण्डा) के आवश्यक भुगतान करने नगर निगम के पास राशि उपलब्ध नहीं है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भोपाल को देयकों के भुगतान करने अनुदान प्रदान करने का प्रस्ताव भेजना होगा। अभी तक आर्थिक हालात सुधर नही रहे हैं। निगम में निर्माण कार्य के बिलों के ही करीब ५० करोड़ रुपए के बकाया बिल है। वर्ष २०२५ में भी हालात सुधरे नहीं हैं।


इस माह नहीं आई चुंगी क्षतिपूर्ति राशि


नगर निगम में चुंगी क्षतिपूर्ति राशि पिछले माह ७२ लाख रुपए मिली। इस माह अगस्त की चुंगी क्षतिपूर्ति राशि अभी तक नहीं आई है। इसके साथ निगम के टैक्स मिलाकर धीरे-धीरे कर्मचारियों की तनख्वाह की जा रही है। करीब १७०० कर्मचारियों का वेतन ३.७५ करोड़ रुपए है। इसके लिए भी राजस्व कर्मचारियों को टैक्स वसूली करने निर्देशित किया गया है।


अस्थायी बाजार शुल्क के सवा करोड़ का नुकसान


पिछले विधानसभा चुनाव २०२३ के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अस्थायी बाजार शुल्क बंद कराने की घोषणा की थी। इसके बाद नगर निगम को करीब १.२५ करोड़ रुपए सालाना टैक्स का नुकसान हुआ है। इस राशि के एवज में सरकार ने कोई क्षतिपूर्ति राशि भी नहीं दी। इससे आर्थिक हालात और बिगड़ गए हैं।


एमआईसी और परिषद में हर बार लेते हैं प्रस्ताव


नगर निगम की एमआईसी और परिषद में हर बार विकास प्रस्ताव लिए जाते हैं लेकिन बजट की कमी से हर बार अटक जाते हैं। चाहे टाउन हाल में ई-लाइब्रेरी हो या फिर ट्रांसपोर्ट नगर। इसके अलावा आईएसबीटी, सडक़ और नाली के प्रस्ताव भी शामिल है।


इनका कहना है…


नगर निगम के लिए बजट की मांग मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री से की गई है। जल्द की ये राशि प्राप्त होने की आशा है।
-विक्रम अहके, महापौर, नगर निगम।