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जमीन तो ले ली, लेकिन मुआवजा मिला न नौकरी

जमुनिया पठार में वेकोलि की भूमिगत कोयला खदान प्रस्तावित है। इसके लिए सीबी ए एक्ट 1957 के सेक्शन 9 के अंतर्गत 12 जनवरी 2012 में किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई । जिसके बदले में किसानों को वेकोलि प्रबंधन ने अब तक किसानों को ना मुआवजा दिया है और ना ही नौकरी दी है।

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compensation or job

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छिंदवाड़ा/परासिया. ग्राम पंचायत जमुनिया पठार के किसानों ने वेकोलि प्रबंधन पर प्रताडऩा का आरोप लगाया है। किसानों ने भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह को अपनी परेशानी बताई और मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की बात कही।
गौरतलब है कि जमुनिया पठार में वेकोलि की भूमिगत कोयला खदान प्रस्तावित है। इसके लिए सीबी ए एक्ट 1957 के सेक्शन 9 के अंतर्गत 12 जनवरी 2012 में किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई । जिसके बदले में किसानों को जमीन का मुआवजा और नौकरी देने का प्रावधान है। लेकिन वेकोलि प्रबंधन ने अब तक किसानों को ना मुआवजा दिया है और ना ही नौकरी दी है। स्थानीय किसान धारा सिंह, पप्पू नागवंशी, जोगेश्वर नागवंशी, सरवन नागवंशी, पुष्पराज नागवंशी, नारायण नागवंशी,लख्मीचंद खोबरे, संतोष खोबरे, भाजपा युवा मोर्चा ग्रामीण मंडल के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह के नेतृत्व में किसान बीएमएस के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह से मिले। उन्होंने कहा प्रबंधन ने हमारे साथ छल किया है । हमारी जमीनों को अधिग्रहित कर अब तक अनुबंध के अनुसार ना तो मुआवजा मिला है और ना ही किसी को नौकरी दी गई है। हम अपनी जमीनों को उपयोग भी नहीं कर सकते। सिंह ने इस मामले में प्रबंधन से बात कर शीघ्र ही समस्या का समाधान करवाने का आश्वासन दिया है ।

कामगारों को नहीं मिली भविष्य निधि राशि
परासिया. आरसीसीपीएल कोल माइंस सियाल घोगरी भूमिगत कोयला खदान के कामगारों को सालभर बीतने के बाद भी प्रोविडेंट फं ड की राशि नहीं मिली है। खदान का संचालन निजी ठेकेदार द्वारा किया जाता है।
नाराज कामगारों ने प्रबंधन के खिलाफ पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराई है । कामगार धर्मेंद्र पगारे, राकेश यादव, नेमचंद पवार,अनिल सरेआम, संदीप पगारे, भगवानदास मेश्राम,नरेश पवार, सहदेव पवार, राजेश पवार सहित अन्य कामगार लिखित शिकायत लेकर उमरेठ थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे साल भर से काम पर नहीं है। जिससे उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
कामगारों ने बताया प्रबंधन के आर्थिक विरोधी , मजदूरों का शोषण करने के रवैए के चलते लगभग 1 साल पूर्व सभी कामगारों ने त्यागपत्र दे दिया था। काम के दौरान उनका 19 फीसदी प्रोविडेंट फं ड काटा गया, लेकिन यह राशि उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। प्रबंधन द्वारा कामगारों को धमकाया जाता है। उल्टे-सीधे मामलों में फं सा देने की बात कही जाती है। जिसके चलते कामगार अपने हक का पैसा प्रबंधन से नहीं ले पा रहे हैं।थाना प्रभारी राकेश बघेल का कहना है कि मामला जांच में लिया गया है। प्रबंधन से बात कर समस्या का निराकरण कराया जाएगा।