छिंदवाड़ा. पाठाढाना गोशाला में एक समय में 150 से 300 तक गोवंशों की देखरेख होती है, जिसके लिए निगम हर साल लाखों रुपए खर्च करता है। खर्च बचाने के लिए गोशाला मेें कुछ एजेंसियों की मदद से गो मूत्र एवं गोबर से कुछ उत्पाद बनाने के प्रयास किए गए, लेकिन वह असफल रहे।