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एक व्रत से ही मिल जाएगा साल भर के व्रत का पल

निर्जला एकादशी आज  भीमसेनी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध, निर्जला व्रत का विशेष महत्व

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P shanker G

Jun 16, 2016

NIRJALA EKADASHI

NIRJALA EKADASHI

छिंदवाड़ा
- निर्जला एकादशी का व्रत 16 जून को किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक साल की सभी एकादशी में निर्जला एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पद्म पुराण के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी व भीमसेनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह सबसे कठोर व्रत में शामिल है। इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को साल भर की एकादशी का पुण्य प्राप्त होता है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि बहुभुजी भीमसेन के नाम से प्रतिष्ठित है। भीमसेन ने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला व्रत किया था। इस व्रत से आरोग्यवृद्धि के तत्व विकसित होते हैं।


पंडित शांतनु शास्त्री ने बताया कि यदि कोई सालभर की एकादशी का व्रत नहीं रख पाता हो तो भीमसेनी एकादशी के व्रत से उसे वे सभी पुण्य लाभ प्राप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि युधिष्ठिर के भ्राता भीमसेन के पेट में वृक होने के कारण उसे अधिक भूख लगती थी। इस कारण वह चाहकर भी एकादशी का व्रत नहीं रह पाते थे। एक बार उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि ऐसा कोई उपाय बताइए, जिससे सारे एकादशी का पुण्य मिले। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें निर्जला एकादशी के बारे में बताया। भीमसेन ने बिना जल ग्रहण किए इस व्रत को किया तब से उसे निर्जला एकादशी व्रत नाम से जाना जाने लगा।


निर्जला एकादशी व्रत विधि

निर्जला एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले यानि दशमी के दिन से ही नियमों का पालन करने का विधान है। एकादशी के दिन ऊं नमो वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। निर्जला एकादशी के दिन गोदान का विशेष महत्व है। निर्जला एकादशी के दिन दान-पुण्य और स्नान का विशेष महत्व होता है। द्वादशी को तुलसी के पत्तों से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।


निर्जला एकादशी में स्नान-दान का महत्व

ज्योतिषाचार्य शांतनु शास्त्री ने बताया कि पद्म पुराण के अनुसार ज्येष्ठ माह की शुक्ल एकादशी को यानि निर्जला एकादशी के दिन व्रत करने से सभी तीर्थों में स्नान के समान पुण्य मिलता है। इस दिन जो व्यक्ति दान करता है वह सभी पापों का नाश करते हुए परमपद प्राप्त करता है। इस दिन अन्न, वस्त्र, जौ, गाय, जल, छाता, जूता आदि का दान देना शुभ माना

जाता है।

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