
ग्रामीणों ने स्कूलों में बंद किये अन्ना जानवर, कहा- छुट्टा जानवरों से मुक्ति को सरकार की योजना सिर्फ हवा-हवाई
चित्रकूट. बुन्देलखण्ड की नासूर बन चुकी अन्ना प्रथा पर लगाम लगाने की सिस्टम की सारी कवायदें नाकाफी साबित हो रही हैं। अन्ना मवेशियों (Anna Animal) की वजह से किसानों की मेहनत बर्बादी के मुहाने पर खड़ी है। आये दिन इस समस्या को लेकर किसान आंदोलन करने को मजबूर हैं। जिम्मेदारों (Yogi Sarkar) के लाख आश्वासन के बावजूद भी इस ज्वलन्त समस्या से निजात मिलती नहीं दिख रही है। शनिवार को जिले के नाराज ग्रामीणों ने अन्ना जानवरों को परिषदीय स्कूलों में बंद कर दिया।
जनपद के पहाड़ी ब्लाक अंतर्गत लोहदा गांव में कई गांव के ग्रामीणों ने सैकड़ों अन्ना जानवरों को जबरन परिषदीय स्कूल में बंद कर दिया। छात्र-छात्राओं व अध्यापकों को बाहर निकालते हुए ग्रामीणों ने मवेशियों को स्कूल परिसर में कैद कर दिया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम तहसीलदार व पुलिस ने किसी तरह आक्रोशित ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया और जानवरों को अस्थाई गौशाला में भिजवाया। ग्रामीणों का कहना था कि कोई उचित कदम इस समस्या से निपटने के लिए नहीं उठाया जा रहा है।
चार दिन से अनशन पर बैठे किसान
अन्ना प्रथा समस्या को लेकर चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है खासकर किसान जो सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इस समस्या से उनका सब्र अब जवाब देने लगा है। जिम्मेदारों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किसान अनशन करने को मजबूर हैं। जनपद के मऊ तहसील में पिछले चार दिनों से भारतीय किसान यूनियन का अनशन जारी है अन्ना समस्या को लेकर। यूनियन के जिलाध्यक्ष राम सिंह पटेल ने कहा कि सिर्फ बातें हो रही हैं, धरातल पर कुछ नहीं दिख रहा। फसलें बर्बाद हो रही हैं। हर बार सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। जिलाधिकारी शेषमणि पाण्डेय ने कहा कि इस समस्या से निपटने के हर सम्भव प्रयास किए जा रहे हैं। गौवंश के रखरखाव के लिए हम सभी को आगे आना होगा।
Updated on:
03 Aug 2019 03:06 pm
Published on:
03 Aug 2019 03:01 pm
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