
चित्रकूट. पहाड़ी इलाकों में अक्सर घाटियों वाले मार्ग आमतौर पर खतरनाक माने जाते हैं। अंधे मोड़ और जलेबी की तरह घुमावदार सड़कें किसी भी वाहन चालक के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं यदि ज़रा सी भी असावधानी हुई तो, लेकिन इसके इतर यदि अचानक वाहन चालकों के सामने अजीब सी स्थिति उत्पन्न हो जाए और उन्हें समझ में न आए कि वाहन किधर जा रहा है तो इसे एक अनसुलझा रहस्य ही कहा जा सकता है। चित्रकूट की कुछ ऐसी ही घाटियां हैं जिन्हें हादसों की घाटियां कहा जाता है और आज तक कई भीषण सड़क दुर्घटनाओं ने इन घाटियों के रहस्य को और भी गहरा कर दिया है। इलाकाई लोगों की माने तो बजरंगबली घाटियों से गुजरने वाले लोगों की रक्षा करते हैं।
पहाड़ी इलाकों से सुसज्जित चित्रकूट की बरगढ़ और काली घाटी आज भी कई रहस्यों को अपने में समेटे हुए हैं। जनपद के मऊ थाना क्षेत्र अंतर्गत पड़ने वाली बरगढ़ घाटी और मानिकपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पड़ने वाली काली घाटी से कभी दिन में भी गुजरने पर लोग खौफ खाते थे। इस वजह से नहीं कि चोर बदमाश लुटेरों का डर था बल्कि इस वजह से क्योंकि घाटी से गुजरने पर हादसों का खौफ लोगों को सताने लगता था। कहा जाता है कि जब से इन घाटियों पर बजरंगबली की मूर्ति स्थापित की गई तब से काफी हद तक हादसों पर नियंत्रण हुआ है लेकिन अभी भी अचानक होने वाले भीषण हादसे घाटियों के खौफ को जिंदा कर देते हैं।
भीषण हादसों की गवाह हैं घाटियां
मानिकपुर की काली घाटी और मऊ की बरगढ़ घाटी के विषय में इलाकाई लोगों की जुबां से माने तो आज भी कभी कभार वाहन चालकों को घाटी से गुजरते समय यह समझ नहीं आता कि अचानक वाहन किधर जा रहा है मसलन कभी कभार चालक कन्फ्यूज हो जाते हैं कि सड़क का मोड़ किस ओर है और हादसा हो जाता है। इसी वर्ष मऊ की बरगढ़ घाटी में जनवरी व् फरवरी के महीने में हुए भीषण सड़क हादसों में 9 लोगों की मौत हो गई थी। एक में 5 की तथा दूसरी दुर्घटना में 4 की मौत हुई थी। ये तो सिर्फ एक उदाहरण भर है बांकी यदि पिछले एक वर्षों पर नजर डालें तो दर्जन भर से अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं इस घाटी में जिसमें कई गम्भीर रूप से घायल तो कइयों की मौत हो गई। मानिकपुर की काली घाटी अपने हादसों की वजह से कभी खौफ का दूसरा नाम हुआ करती थी।
रक्षा करते हैं बजरंगबली
जनपद के मिर्जापुर झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बरगढ़ घाटी और मानिकपुर में स्थित काली घाटी में यदि इलाकाई बाशिंदों की माने तो जब से बजरंगबलि की मूर्ति स्थापित हुई तब से दुर्घटनाओं में कमी आई है। बरगढ़ घाटी के विषय में बताते हुए एक स्थानीय ग्रामीण बुजुर्ग ने बताया कि कई वर्ष पहले एक व्यक्ति की घाटी में दुर्घटना के दौरान मौत हो गई थी तभी से लेकर आज तक कई भीषण दुर्घटनाएं यहां हुई हैं लेकिन बजरंगबली का मंदिर बनने से काफी हद तक हादसों में कमी आई है लेकिन अभी भी डर बना रहता है। मानिकपुर की काली घाटी में भी बजरंगबली का मंदिर बना हुआ है वहां के भी स्थानीय लोगों का कुछ ऐसा ही कहना है।
सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी
बहरहाल स्थानीय लोगों के मुताबिक रहस्य अपनी जगह है लेकिन घाटियों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी कहीं न कहीं हादसों का सबब बनती है। मसलन रात में वाहन चालकों की सुविधा के लिए घुमावदार सड़कों पर न तो कोई रेडियम संकेतक लगाया गया है और न ही सड़क पर रेडियम पट्टियों के निशान बनाए गए हैं। अंधे मोड़ पर भी कोई संकेतक नहीं लगाए गए हैं। अलबत्ता दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र लिखकर ज़िम्मेदारी की इतिश्री कर ली गई है। इसके आलावा वाहनों की तेज रफ़्तार भी एक कारण है।
फ़िलहाल लोगों की अपनी दलीलें हैं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अपना तकाज़ा लेकिन घाटियों के सन्नाटे खौफनाक हादसों की कहानियां जरूर बयां करते हैं।
Published on:
10 May 2018 02:07 pm
बड़ी खबरें
View Allचित्रकूट
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
