
यहां हो गई भाजपा की हैट्रिक
चित्तौडग़ढ़. पंचायत चुनाव में जिला परिषद एवं जिले की ११ पंचायत समितियों में से ९ पंचायत समितियों में मंगलवार को हुई मतगगणना के बाद भाजपा ने अपना परचम लहराया है। भाजपा ने लगातार तीसरी बार जिला परिषद पर कब्जा कर हैट्रिक की है। भाजपा को जिला परिषद के २५ वार्डों में से २१ वार्डों में जीत मिली है। वहीं कांग्रेस चार वार्डों में ही अपने प्रत्याशियों को विजय दिला सकी है। कांग्रेस से जिला परिषद के चुनाव में सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के भाई एवं जिला प्रमुख के प्रबल दावेदार मनोहर आंजना को भी हार का मुंह देखना पड़ा है। वहीं आंजना के गृह क्षेत्र निम्बाहेड़ा पंचायत समिति में भी कांग्रेस की भारी पराजय हुई है। वहीं जिले के बेगूं एवं भदेसर पंचायत समिति में तो कांग्रेस को एक सीट मिली है।
पंचायत राज चुनावों को लेकर हुई मतगणना में चित्तौडग़ढ़, निम्बाहेड़ा, भैसरोडग़ढ़, डूंगला, बड़ीसादड़ी, बेगूं, भूपालसागर, भदेसर एवं राशमी में भाजपा ने कब्जा कर लिया है। वहीं गंगरार एवं कपासन में कांग्रेस एवं भाजपा के बीच कांटे की टक्कर रही है। ऐसे में यहां पर केवल एक-एक सीट का अंतर से कांग्रेस ने बढ़त हासिल की है। वहीं निम्बाहेड़ा पंचायत समिति के वार्ड १५ से सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के भाई मनोहर आंजना मात्र १३३ मतों से विजयी हुए है। वहीं बड़ीसादड़ी के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता प्रकाश चौधरी के पुत्र भी बड़ीसादड़ी पंचायत समिति के वार्ड पांच से मात्र ११४ मतों से विजयी हुए है।
पंचायत समिति में जीते, जिला परिषद में हारे
सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के छोटे भाई ने जिला परिषद के वार्ड १८ से एवं पंचायत समिति के वार्ड १५ से एक साथ चुनाव लड़ा था। ऐसे में जिला परिषद में भूपेन्द्र सिंह बडौली से वे चुनाव हार गए। वहीं पंचायत समिति में भी वे प्रधान के दावेदार के रुप में चुनाव लड़े लेकिन मात्र १३३ वोटों से ही जीत सके। निम्बाहेड़ा में भाजपा का बहुमत मिला है।
कार्यकर्ताओं की अपेक्षा व नेताओं की मनमानी से हारी कांग्रेस
-टिकट वितरण के बाद से ही नाराज थे जमीन से जुड़े कार्यकर्ता
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चित्तौडग़ढ़. जिला परिषद व पंचायतों के चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना ऐसे समय में करना पड़ा है, जब राज्य में कांग्रेस शासन है। जिले में कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर अपनों को टिकट दिलवाना सामने आ रहा है। इस बार विशेष तौर पर इन चुनावों में सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, विधायक राजेन्द्र सिंह विधूड़ी और पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई थी।पंचायतराज चुनाव से पहले यहां जिला कांग्रेस कार्यालय में पंचायतराज चुनाव को लेकर पार्टी की ओर से नियुक्त प्रभारी धर्मेन्द्र राठौड़ की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं की बैठक हुई थी। तब कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कहा था कि जमीन से जुड़े और जिताऊ कार्यकर्ताओं को टिकट दिए जाएंगे। कार्यकर्ताओं के साथ किए गए इस वादे को सबसे पहले सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के विधानसभा क्षेत्र में तोड़ा गया, जब जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को दरकिनार करते हुए आंजना के छोटे भाई मनोहरलाल आंजना को पंचायत समिति और जिला परिषद दोनों के लिए टिकट दे दिया गया। इस निर्णय से कार्यकर्ताओं की नाराजगी का नतीजा यह हुआ कि मनोहरलाल आंजना पंचायत समिति सदस्य का चुनाव तो जीत गए, लेकिन जिला परिषद चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इधर बेगूं विधान सभा क्षेत्र में विधायक राजेन्द्र सिंह विधूड़ी के रिश्तेदार महावीर गुर्जर को अन्य राज्य से लाकर यहां जिला परिषद का टिकट दे दिया गया। यहां पंचायत समिति चुनाव में भी बाहरी महिला को टिकट दिया गया। इसका नतीजा यह रहा कि यहां कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा।
आंजना को सौंपी थी जिम्मेदारी
पंचायतरात चुनाव से पहले प्रमुख कार्यकर्ताओं की चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र राठौड़ की मौजूदगी में जिला कांग्रेस कार्यालय में हुई बैठक में पार्टी के नेताओं ने पंचायत व जिला परिषद चुनाव को लेकर सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना को जिम्मेदारी सौंपी थी और टिकट वितरण में भी आंजना का खासा दखल रहा था। यहां तक कि मतदान के बाद प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी भी छोटीसादड़ी में की गई थी। इन सब के बावजूद टिकट वितरण में जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं की जमकर उपेक्षा के कारण अंदरखाने नाराजगी के चलते पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी है।
कपासन ने रखी कांगे्रस की लाज
जिला परिषद की २५ में से २१ सीटों पर भाजपा प्रत्याशी विजयी रहे हैं। कांग्रेस के खाते में जो चार सीटें आई हैं, इनमें सर्वाधिक तीन सीटें कपासन विधानसभा क्षेत्र से आई है। यहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडऩे वाले आनन्दीराम खटीक पिछले दो साल से लगातार लोगों से सीधा संपर्क साधे हुए हैं और पंचायतराज चुनाव में भी क्षेत्र में दौरे जारी रखे। जिला परिषद में एक सीट बेगूं विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के खाते में आई है। निम्बाहेड़ा, चित्तौडग़ढ़ और बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र से जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई है। जबकि निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र से उदयलाल आंजना वर्तमान में विधायक व केबिनेट मंत्री है। बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र से प्रकाश चौधरी विधायक रह चुके हैं और चित्तौडग़ढ़ विधानसभा क्षेत्र से सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत दो बार विधायक रह चुके हैं।
पंचायत चुनाव में भी कपासन व गंगरार ने बचाया मान
पंचायत समितियों के चुनाव में भी पूरे जिले में सिर्फ कपासन और गंगरार में ही कांग्रेस को बहुमत मिला है। जबकि चित्तौडग़ढ़ जिला मुख्यालय सहित जिले की नौ पंचायत समितियों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।
परिणाम से पहले ही लहरा गए थे भाजपा के झण्डे
मेजर नटवरसिंह स्कूल में पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतगणना शुरू होने के बाद से ही कलक्ट्रेट चौराहे से लेकर शास्त्री नगर चौराहे तक कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। परिणाम घोषित होने से पहले ही चौराहे पर कार्यकर्ताओं ने भाजपा के झण्डे लहराने शुरू कर दिया। जैसे-जैसे भाजपा के पक्ष में परिणाम आते गए, वैसे-वैसे कलक्ट्रेट चौराहे से लेकर शास्त्री नगर चौराहे तक कार्यकर्ताओं की भीड़ बढती गई। परिणाम घोषित होने के बाद यहां पहुंचे विजयी प्रत्याशियों को कार्यकर्ताओं ने कंधे पर उठाकर नारेबाजी शुरू कर दी।
जीत के जोश में भूल गए कोरोना का खतरा
कलक्ट्रेट से लेकर शास्त्री नगर चौराहे तक जमा हुई कार्यकर्ताओं की भीड़ में अधिकांश कार्यकर्ता बिना मास्क के ही नजर आए। यह कार्यकर्ता जानकार भी कारोना के खतरे से अनजान नजर आए। मौके पर पुलिस के जवान भी तैनात थे, लेकिन किसी ने भी इन्हें मास्क लगाने ेके लिए नहीं टोका।
चाक-चौबंद रही पुलिस
मेजर नटवरसिंह स्कूल में मतगणना होने से शास्त्री नगर चौराहे से लेकर केन्द्रीय कारागृह तक वाहनों की व आमजन की आवाजाही पर रोक रही, ऐसे में वाहनों को शास्त्री नगर होकर बायपास की तरफ डायवर्ट किया गया। इससे आवाजाही में परेशानी बनी रही। पुलिस चाक-चौबंद तो रही, लेकिन कांग्रेस व भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ से कोरोना गाइड लाइन की पालना करवाने में पूरी तरह से विफल रही।
आते गए परिणाम, छंटते गए कांग्रेस कार्यकर्ता
मतगणना शुरू होने पर शास्त्री नगर चौराहे पर कांगे्रस कार्यकर्ताओं की भी भीड़ रही, लेकिन जैसे ही भाजपा के पक्ष में परिणाम आने लगे, धीरे-धीरे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ छंटती गई और भाजपा कार्यकर्ताओं का हुजूम बढता गया।
भाजपा की हैट्रिक
चित्तौडग़ढ़ जिला परिषद में पिछले 15 सालों से भाजपा का कब्जा है। अर्थात पिछले तीन बार से लगातार भाजपा का ही जिला प्रमुख बन रहा है। यहां पर 2010 में भाजपा के विधायक अर्जुन जीनगर के छोटे भाई की पत्नी सुशीला जीनगर जिला प्रमुख बनी। हालाकि इस बार वे राशमी में पंचायत समिति सदस्य का चुनाव हार गई। वहीं २०१५ में डेयरी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक बद्रीलाल जाट के भतीजे की पत्नी लीला जाट को भाजपा से जिला प्रमुख बनाया गया।
Published on:
08 Dec 2020 10:53 pm
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