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चित्तौड़ में पहले दिन तुली 16 क्विन्टल से ज्यादा अफीम

नारकोटिक्स विभाग के तीनों खण्डों में शुक्रवार से अफीम के तोल का काम शुरू हो गया। विभाग के चित्तौडग़ढ़ स्थित परिसर में खण्ड प्रथम व द्वितीय के अधीन आने वाले 14 गांवों के 219 किसानों की अफीम का तोल हुआ। दोनों ही खण्ड में प्रथम दिन 16 क्विन्टल 66 किलो 600 ग्राम अफीम तोली गई।
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चित्तौड़ में पहले दिन तुली 16 क्विन्टल से ज्यादा अफीम


चित्तौडग़ढ़. नारकोटिक्स विभाग के तीनों खण्डों में शुक्रवार से अफीम के तोल का काम शुरू हो गया। विभाग के चित्तौडग़ढ़ स्थित परिसर में खण्ड प्रथम व द्वितीय के अधीन आने वाले 14 गांवों के 219 किसानों की अफीम का तोल हुआ। दोनों ही खण्ड में प्रथम दिन 16 क्विन्टल 66 किलो 600 ग्राम अफीम तोली गई।
खण्ड प्रथम में शुक्रवार को अमरपुरा लुनाडा, सारंगपुरा गाडरियावास, गदापुरा, केसरपुरा व बाड़ा गांव के १०६ किसानों की अफीम का तोल किया गया। इन सभी किसानों की अफीम का कुल तोल लगभग ८५० किलोग्राम हुआ। शनिवार को १६ गांवों के किसानों की अफीम का तोल किया जाएगा। अफीम तुलाई के लिए दो इलेक्ट्रिक कांटे लगाए गए।
इसी तरह विभाग के खण्ड द्वितीय में कपासन क्षेत्र के नारिया, दामाखेड़ा, माताजी का खेड़ा, काछिया खेड़ी, बुद्धाखेड़ा, दांता बालरड़ा व लांगच के ११३ किसानों की अफीम का तोल किया गया। इन किसानों की अफीम का कुल तोल ८१६.६०० किलोग्राम हुआ। शनिवार को छह गांवों के किसानों की अफीम का तोल होगा।
खण्ड तृतीय के अधीन आने वाले गांवों के किसानों की अफीम का तोल निम्बाहेड़ा में किया गया। वहां १४ गांवों के १४३ किसानों की अफीम का तोल हुआ।
पहले प्रसाद-अगरबत्ती, फिर तुलाई
खण्ड प्रथम में स्थपित किए गए इलेक्ट्रिक कांटों के पहले अगरबत्ती लगाई गई। इसके बाद प्रसाद चढाया गया। किसानों की धार्मिक भावनाओं के अनुसार यह काम करने के बाद अफीम तोल का काम शुरू किया गया। इस दौरान किसान भैरूनाथ के जयकारे लगाते देखे गए।
नारकोटिक्स विभाग में मेले सा नजारा
यहां नारकोटिक्स विभाग परिसर में शुक्रवार को अफीम का तोल करवाने २१९ किसान अफीम लेकर पहुंचे। विभाग के परिसर में नजारा मेले जैसा लग रहा था। विभाग ने किसानों के बैठने के लिए टैंट सहित पंखे-कूलर और पानी की व्यवस्था की है। सुबह नमूनों का परिणाम आने के बाद अफीम तोल का काम शुरू हुआ। इस दौरान विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
किसानों में एसीबी कार्रवाई की चर्चा
अफीम तुलाई के लिए नारकोटिक्स विभाग पहुंचे किसानों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से की गई कार्रवाई की चर्चा रही। कई किसान इस कार्रवाई को लेकर खुश नजर आए तो कुछ किसान अन्दरखाने यह कहते सुने गए कि हमें तो इन्हीं से काम चलाना पड़ेगा। एसीबी की कार्रवाई को लेकर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी खासी हलचल रही।
किसानों व मुखियाओं के लिए चस्पा की सूचना
केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरों की ओर से किसानों और मुखियाओं के लिए सूचना का फ्लेक्स लगाया गया, जिसमें कहा गया कि किसानों या मुखियाओं से यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति, विभागीय अधिकारी या कर्मचारी अफीम तोल के दौरान किसी भी प्रकार से अवैध रकम की मांग करता है तो इसकी सूचना अधिकारियों को दें। इसमें अधिकारियों के फोन और फैक्स नम्बर भी अंकित किए गए है।
सर्वाधिक दर साढ़े तीन हजार व सबसे कम ८७० रूपए
नारकोटिक्स ब्यूरो ने फसल वर्ष २०१८-१९ से देय अफीम की दरों के बारे में भी फ्लैक्स के जरिए किसानों को जानकारी दी है। इसमें प्रति हैक्टेयर औसत उपज प्रति किलोग्राम तथा दर प्रति किलोग्राम (७० डिग्री गाढता) के अनुसार बताई गई है। ४४ किलोग्राम हैक्टेयर तक ८७० रूपए, ४४ किलोग्राम हैक्टेयर से अधिक और ५२ किलोग्राम हैक्टेयर तक एक हजार रूपए, ५२ किलोग्राम से अधिक और ५६ किलोग्राम हैक्टेयर तक १२७५ रूपए, ५६ किलोग्राम से अधिक और ६० किलोग्राम हैक्टेयर तक १३९० रूपए, ६० किलोग्राम से अधिक और ६५ किलोग्राम हैक्टेयर तक १७४० रूपए, ६५ किलोग्राम से अधिक और ७० किलोग्राम हैक्टेयर तक १८७५ रूपए, ७० किलोग्राम से अधिक और ७५ किलोग्राम हैक्टेयर तक २०५० रूपए, ८० किलोग्राम हैक्टेयर तक २२५० रूपए, ८५ किलोग्राम हैक्टेयर तक २५०० रूपए, ९० किलोग्राम हैक्टेयर तक ३००० रूपए तथा ९० किलोग्राम हैक्टेयर से अधिक पर ३५०० रूपए प्रति किलोग्राम दर होगी। यह दरें अग्रिम आदेश तक प्रभावी रहेगी।
विभाग ने दी है किसानों को पूर्व चेतावनी
नारकोटिक्स विभाग ने अफीम काश्तकारों को पूर्व चेतावनी भी दी है। इसमें कहा गया है कि आने वाले वर्ष २०१९-२० में अफीम पोस्त की खेती के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की पात्रता के लिए फसल वर्ष २०१८-१९ के दौरान ५.९ किलोग्राम मार्फिन प्रति हैक्टेयर की न्यूनतम अर्हक उपज देनी होगी। वर्ष २०१८-१९ के दौरान दी गई अफीम में मार्फिन की मात्रा को फसल वर्ष २०१९-२० के भुगतान का आधार माना जा सकता है और यदि सरकार इस बारे में निर्णय करे तो फसल वर्ष २०१८-१९ के लिए लाइसेंस की पात्रता भी माना जा सकता है। इसके अलावा ऐसे किसान, जिन्होंने फसल वर्ष २०१५-१६, २०१६-१७ व २०१७-१८ के दौरान अपनी पूरी फसल की जुताई कर दी थी। उनको फसल वर्ष २०१९-२० के लिए लाइसेंस का पात्र नहीं माना जाएगा। यदि उन्होंने फसल वर्ष २०१८-१९ में भी पुन: अपनी फसलों की पूरी तरह जुताई कर दी हो।

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