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62 गांवों के किसानों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा, बर्बाद हो जाएगी ये चीज, जानें पूरा मामला

जिले के जल स्त्रोतों में पानी को लेकर अभी से ही संकट का दौर शुरू हो गया है।

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चित्तौड़गढ़। जिले के जल स्त्रोतों में पानी को लेकर अभी से ही संकट का दौर शुरू हो गया है। निम्बाहेड़ा और चित्तौड़गढ़ के 62 गांवों की फसलों को जीवन देने वाला गंभीरी बांध भी रीता पड़ा हैं। बांध में अभी सिर्फ 15.7 फीसदी पानी ही हैं। बांध में पानी नहीं आया तो इन 62 गांवों के किसानों पर एक बार फिर रबी के सीजन में आफत आ जाएगी।

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चित्तौड़गढ़ जिले में इस बार मानसून की बेरूखी के चलते अधिकांश बांध और तालाबों सहित जल स्त्रोत खाली पड़े हैं। गंभीरी बांध से निम्बाहेड़ा क्षेत्र के 19 व चित्तौड़गढ़ क्षेत्र के 43 गांवों के किसानों को फसल की सिंचाई के लिए नहरों के जरिए पानी उपलब्ध कराया जाता हैं। इन गांवों की 7575 हैक्टेयर क्षेत्रों में फसलों की पिलाई गंभीरी बांध से नहरों के जरिए खेतों तक पहुंचने वाले पानी से सिंचाई होती हैं। हालाकि कुछ किसानों ने नदी के किनारे ट्यूबवैल भी खुदवा रखे हैं, लेकिन ऐसे किसानों की संख्या बहुत कम हैं। नहरों में पानी पहुंचने पर सत्तर से अस्सी फीसदी किसानों को यह दुविधा झेलनी होगी। गंभीरी बांध में पानी नहीं आया तो रबी के सिजन में नहरों में पानी छोड़ना संभव नहीं हो पाएगा, ऐसे में रबी की सिंचाई को लेकर किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा भी जिले के सभी बांध-तालाबों में क्षमता के मुकाबले इस बार एक तिहाई पानी की ही आवक हुई हैं, ऐसे में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं।

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32.5 फीसदी आवक
जिले के बांध-तालाबों में क्षमता के मुकाबले इस बार अब तक 32.5 फीसदी पानी ही आया हैं।
राजकुमार शर्मा, अधिशासी अभियंता जल संसाधन विभाग चित्तौड़गढ़

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