26 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान के इस कुंड में 15 दिन में हड्डियां बन जाती है मिट्टी, पूर्वजों का रखा जाता है पूरा रिकॉर्ड

चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित प्राचीन सारणेश्वर महादेव मंदिर का अस्थि कुंड इस परंपरा को एक विस्मयकारी मोड़ देता है। यहां अस्थियां बहती नहीं, बल्कि शांत जल के आगोश में समाकर कुछ ही दिनों में पंचतत्व (मिट्टी) में विलीन हो जाती हैं।

2 min read
Google source verification
saraneshwar mahadev asthi kund

सारणेश्वर महादेव मंदिर का अस्थि कुंड। फोटो पत्रिका

गंगरार (चित्तौड़गढ़)। आमतौर पर सनातन धर्म में मृत आत्मा की शांति के लिए अस्थियों को गंगा जैसी पवित्र नदियों के बहते जल में विसर्जित किया जाता है, ताकि वे जल के साथ अनंत की यात्रा पर निकल सकें लेकिन चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित प्राचीन सारणेश्वर महादेव मंदिर का अस्थि कुंड इस परंपरा को एक विस्मयकारी मोड़ देता है। यहां अस्थियां बहती नहीं, बल्कि शांत जल के आगोश में समाकर कुछ ही दिनों में पंचतत्व (मिट्टी) में विलीन हो जाती हैं।

रहस्यमयी कुंड: जहां 15 दिन में मिट जाता है हड्डियों का अस्तित्व

मंदिर परिसर में छह अलग-अलग कुंड बने हुए हैं, लेकिन प्रकृति की यह अद्भुत कीमियागिरी केवल एक ही चिन्हित कुंड में देखने को मिलती है। स्थानीय मान्यता और पुजारियों के अनुभव बताते हैं कि इस कुंड के जल में विसर्जित की गई राख और हड्डियां एक पखवाड़े (15 दिन) के भीतर पूरी तरह गलकर मिट्टी का रूप ले लेती हैं।

मिनी हरिद्वार सा अहसास

यह स्थान अब केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मेवाड़ के लोगों के लिए अस्थि विसर्जन तीर्थ बन चुका है। यहां की व्यवस्थाएं इसे हरिद्वार और मातृकुंडिया जैसे बड़े तीर्थों के समकक्ष खड़ा करती हैं।

डिजिटल युग में बही-खाता

पुजारी शंकरलाल, गणेशलाल, गोपाललाल एवं पाराशर परिवार आने वाले हर श्रद्धालु का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखते हैं। प्रतिवर्ष 1000 से अधिक लोग यहां अस्थि विसर्जन के लिए आते हैं, जिनमें से 300 से अधिक परिवार पूर्ण शास्त्रोक्त विधि से तर्पण करवाते हैं। पोथी में मृतक का नाम, गांव, जिला और तर्पणकर्ता का विवरण दर्ज किया जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी वंशावली देख सकें।

क्या पानी में छुपा है कोई रासायनिक राज?

इस चमत्कार को लेकर पुरातत्व विभाग के अधिकारी प्रवीण सिंह का कहना है कि यह शोध का एक बड़ा विषय हो सकता है। उनके अनुसार गंगरार के इस विशेष कुंड में हड्डियों का इतनी जल्दी गलना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आश्चर्यजनक है। इसकी असल वजह तभी सामने आएगी जब भू-विज्ञान विभाग इसके पानी और तलछट की मिट्टी की जांच करे। संभव है कि यहां की भू-गर्भीय संरचना में कुछ विशेष खनिज हों जो कैल्शियम को तेजी से विघटित करते हों।

आस्था की जीत: महादेव का आशीर्वाद

भले ही विज्ञान जांच की बात करे, लेकिन मेवाड़ के जनमानस के लिए यह साक्षात महादेव की महिमा है। श्रद्धालु पूर्व प्रधान शिवलाल पुरबिया, शक्तिसिंह शक्तावत, कालू लाल माली, मधुसूदन एन शर्मा कहते हैं कि हरिद्वार जाना सबके लिए संभव नहीं होता, ऐसे में सारणेश्वर महादेव का यह धाम हमारे लिए वरदान है। यहां आकर मन को असीम शांति मिलती है कि हमारे पूर्वज महादेव की ही शरण में मिट्टी बनकर समा गए।