
डेयरी कर्मचारी बोले, वर्चस्व की लड़ाई में पिसरहे हैं हम
-अधिकारी व कर्मचारी तनावपूर्ण माहौल में कर रहे है काम
-प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर समस्या के समाधान की मांग
चित्तौडग़ढ़
चित्तौडग़ढ़-प्रतापगढ़ दुग्ध उत्पादक संघ (सरस डेयरी) में अध्यक्ष और प्रबंध संचालक की लड़ाई में अधिकारी और कर्मचारी पिसरहे हैं। डेयरी के अधिकारियों व कर्मचारियों ने राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन की प्रबंध निदेशक को लिखे पत्र में यह बात कही है। कार्मिकों ने इस समस्या के समाधान की भी मांग की है।
डेयरी के अधिकारियों व कर्मचारियों ने प्रबंध निदेशक को लिखित रूप में अवगत कराया है कि डेयरी में स्वीकृत स्टाफ १०१ के विरूद्ध सिर्फ १३ स्थायी अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत है। जिन्होंने ठेकाकर्मियों के सहयोग से दस वर्ष के अल्प कार्यकाल में ही प्रदेश के २१ दुग्ध संघों में चित्तौड़ दुग्ध संघ को पांचवें स्थान पर पहुंचाया है। कार्मिकों ने कहा है कि हाल में संघ में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए है, जिससे मानसिक तनाव और प्रताडऩा झेलनी पड़ रही है। कार्मिकों ने प्रबंध निदेशक को अवगत कराया है कि ऐसा डेयरी अध्यक्ष और प्रबंध संचालक के बीच वर्चस्व और श्रेय लेने की होड़ और दोनों के बीच तालमेल नहीं बन पाने के कारण हो रहा है।
फिर क्या करे कर्मचारी
कार्मिकों ने कहा है कि हाल ही संघ में एसीबी का छापा भी पड़ा है। अध्यक्ष उन्हें यह कहकर प्रताडि़त करते हैं कि आप लोग प्रबंध संचालक से मिले हुए हो और प्रबंध संचालक भी यही कहकर प्रताडि़त करते है कि आप लोग अध्यक्ष का साथ देते हो। जबकि अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ संघ के हित में कार्य करते है। दोनों की प्रताडऩा झेलते-झेलते अब स्थिति सहनशक्ति से बाहर हो रही है। तनाव और दबाव की स्थितियों के चलते कई कर्मचारी बीमार हो चुके है।
इनका डेयरी में क्या काम
प्रबंध निदेशक को बताया गया है कि डेयरी में दोनों ही पक्ष अवांछित व्यक्तियों को डेयरी परिसर में लाते हैं, जिनका डेयरी की गतिविधियों से कोई सरोकार नहीं है। इसका उद्देश्य सिर्फ कर्मचारियों में भय पैदा कर अपने-अपने पक्ष में वातावरण पैदा करना है।
यह भी दी चेतावनी
कर्मचारियों और अधिकारियों ने प्रबंध निदेशक को लिखे पत्र में यह भी चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें सामुहिक अवकाश पर जाने को मजबूर होना पड़ेगा। कार्मिकों ने यह भी मांग की है कि समस्या का समाधान नहीं हो सके तो हमारी सेवाएं इस संघ से किसी भी अन्य दुग्ध संघ में या आरसीडीएफ या उसकी किसी यूनिट में स्थानान्तरित कर दी जाए।
डेयरी अध्यक्ष बोले, मेरे खिलाफ साजिश हो रही है
इधर डेयरी अध्यक्ष बद्रीलाल जाट ने कहा है कि उनके खिलाफ साजिश और षडय़ंत्र कर छवि खराब करने का काम किया जा रहा है। जबकि उन्होंने कड़ी मेहनत से डेयरी को इस मुकाम तक पहुंचाया है। किसानों को ढाई करोड़ रूपए तक का भी लाभांश वितरित किया है। लेकिन प्रबंध संचालक घी के बढे हुए दाम जोड़कर डेयरी के लाभ मेें होने का झूठा प्रचार कर रहे हैं। पन्द्रह करोड़ का ऋण लेने के मामले में भी बैंक ने इन्हें नोटिस दिया है।
मुझे भी खतरा महसूस हो रहा
इधर प्रबंध संचालक सोहनलाल बरड़वा का भी कहना है कि उन्हें धमकियां दी जा रही है, इसलिए खतरा महसूस हो रहा है। जिन लोगों ने धमकियां दी है, उसके सबूत भी है। इस संबंध में पुलिस की शरण लेनी पड़ेगी। बरड़वा का कहना है कि मुझ पर लगाए जा रहे आरोप भी सही नहीं है।
सिक्यूरिटी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं
गौरतलब है कि पिछले दिनों डेयरी से ८ हजार ७०० लीटर दूध चोरी हुआ था। इस मामले में वहां तैनात सिक्यूरिटी गार्ड्स की भूमिका पर भी सवाल उठे, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। क्यों कि डेयरी से दूध का टैंकर सुरक्षा में सेंध लगाकर ही गायब हुआ था।
डेयरी के लाभ को लेकर हो रहा है आंकड़ों का खेल
डेयरी अध्यक्ष बद्रीलाल जाट ने रविवार को विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि प्रबंध संचालक की ओर से दुग्ध संघ में दिखाया गया लाभ सही नहीं है। संघ में मार्च २०१९ से जून २०१९ तक घी का स्टॉक ३१० टन था। घी के भाव में चार बार वृद्धि होने से घी के स्टॉक पर करीब सवा करोड़ रूपए की अतिरिक्त आय हुई। इसी अवधि में दूध पाउडर (एसएमपी) का स्टॉक २५० टन था, जिसके भाव में पांच बार वृद्धि होने से करीब एक करोड़ रूपए की स्टॉक पर अतिरिक्त आय हुई। दो करोड़ रूपए का जो लाभ बताया जा रहा है, वह घी और दूध पाउडर के भाव बढने से हुआ है। उन्होंने बताया कि मार्च में घी की दर ३४८ रूपए लीटर थी जो अब ४०५.५६ रूपए लीटर है। पन्द्रह लीटर घी का पैक मार्च में ५५८८ रूपए का था, जो अब ६४०७.८५ रूपए का है। इसी तरह मार्च में दूध पाउडर के भाव १८५ रूपए प्रतिकिलो थे, जो अब २६० रूपए प्रतिकिलो है।
Published on:
01 Jul 2019 06:04 am
