
मामला दर्ज करने में देरी हुई तो जिम्मेदार होंगे थानेदार
चित्तौडग़ढ़. अलवर में सामूहिक दुष्कर्म मामले में समय पर रिपोर्ट दर्ज नहीं करने के आरोपों से घिरे पुलिस महकमे ने अब सुधार की कवायद शुरू कर दी है। पुलिस
महानिदेशक कपिल गर्ग ने स्वयं माना है कि कई प्रयासों के बाद भी पुलिस थानों में प्रकरण दर्ज नहीं करने के मामले सामने आए है। यहां तक कि थानाधिकारी भी अपने उत्तरदायित्व से बचने का प्रयास करते है। गर्ग ने शुक्रवार को अभियोग पंजीबद्ध करने के संबंध में परिपत्र जारी किया है। इसमें स्पष्ट कर दिया गया कि अब थाने में मामले दर्ज करने से इंकार करने या विलंब करने के प्रकरण सामने आते है तो सम्बन्धित थाना प्रभारी जिम्मेदार होंगे। ऐसी शिकायत मिलने पर सम्बन्धित थानेदार के खिलाफ १६ सीसीए के अन्तर्गत कार्रवाई की जाएगी।यह थानाधिकारी का उत्तरदायित्व होगा कि प्रकरणों के पंजीकरण के लिए परिवादी को थाने के चक्कर नहीं काटने पड़े और उनका प्रकरण बिना विलंब दर्ज हो।परिपत्र में डीजीपी ने माना कि कई अवसर पर थानाधिकारी से जानकारी करने पर वह परिवादी के स्वयं से नहीं मिलना बताकर अपने उत्तरदायित्व से बचने का प्रयास करते हैं। परिपत्र में साफ किया गया कि थानों पर प्राप्त सभी शिकायतों में पुलिस के समक्ष दो ही विकल्प है। उपयुक्त मामलों को स्थाई हल के लिए सीएलजी सदस्यों को सौंपा जाए और शेष संज्ञेय अपराधों को दर्ज कर अनुसंधान किया जाए।
नहीं चलेगा व्यस्तता का बहाना
डीजीपी ने साफ कर दिया है कि प्रकरण दर्ज कराने की जिम्मेदारी थानाधिकारी की होगी। यदि थानाधिकारी उपार्जित अवकाश या प्रशिक्षण में गया हुआ है तो यह जिम्मेदारी थाने के दूसरे वरिष्ठतम पुलिस अधिकारी की होगी। थानाधिकारी व्यस्तता का बहाना बनाकर परिवादी को नहीं लौटाएंगे।स्वयं से नहीं मिलने के कारण थानाधिकारी पंजीकरण की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं माना जाएगा।
Updated on:
11 May 2019 10:48 pm
Published on:
11 May 2019 10:48 pm
