
साक्षरता व जागरूकता के साथ कैसे बढ़ता गया वोटों का ग्राफ
चित्तौैडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र
निलेश कांठेड़. चित्तौडग़ढ़. राजनीतिक जागरूकता बढऩे व साक्षरता का प्रसार हुआ तो सीधा असर लोकसभा चुनावों के मतदान पर भी आया। देश में पहली बार 1952 में हुए लोकसभा चुनाव में चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र में एक चौथाई से कुछ अधिक 27.78 प्रतिशत मतदाताओं ने सांसद चुनने के लिए भागीदारी की। करीब तीन चौथाई मतदाताओं के मतदान केन्द्र से दूरी बनाने के पीछे उस समय देश में साक्षरता की दर मात्र 18 प्रतिशत होने वे राजनीतिक जागरूकता की कमी भी बड़ा कारण बना। समय के साथ लोग मताधिकार का महत्व समझने लगे और साक्षरता का ग्राफ चढ़ा तो उसका असर वोट प्रतिशत पर भी परिलक्षित होने लगा। देश में साक्षरता दर 1981 में 43 प्रतिशत से अधिक पहुंची तो चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र में वर्ष 1977 के चुनाव में मतदान का ग्राफ पहले लोकसभा चुनाव की तुलना में करीब दो गुणा 55.44 प्रतिशत हो गया। चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र में अब तक हुए 16 लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक 69.57 प्रतिशत मतदान वर्ष 1998 के चुनावों में हुआ। पिछली बार वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में करीब दो तिहाई मतदाताओं 64.47 प्रतिशत ने मताधिकार का उपयोग किया था। वर्ष 2011 में साक्षरता का ग्राफ देश में 74 फीसदी तो चित्तौडग़ढ़ में 82 फीसदी से अधिक हो गया।
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मतदाता जागरूकता अभियानों का भी असर
देश के शुरूआती लोकसभा व विधानसभा चुनावों में बहुत कम मतदान होने के बाद सरकारों के साथ निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं को जागरूक करने के लिए कई अभियान शुरू किए। मीडिया के माध्यम से भी मतदाताओं को मताधिकार का महत्व समझाया गया। राजनीतिक दलों ने भी अधिकाधिक मतदान कराने के प्रयास शुरू किए। सभी स्तर के प्रयासों से राजनीतिक जागरूकता बढऩे का सीधा असर मतदाता प्रतिशत पर भी दिखा व लोग घरों से निकल मतदान केन्द्रों तक पहुंचने लगे।
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1998 में हुआ 32 प्रतिशत अधिक मतदान
चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र में 1952 के पहले चुनाव के बाद 1967 तक निरन्तर मत प्रतिशत बढ़ते गए। पहली बार 1971 में करीब चार प्रतिशत की गिरावट हुई लेकिन फिर उसके बाद 1977 के चुनाव में सात प्रतिशत से अधिक मतदान प्रतिशत बढ़ा। मतदान प्रतिशत में सर्वाधिक बढ़ोतरी वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में हुई जब चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र में दो वर्ष पहले 1996 के लोकसभा चुनाव के37.95 प्रतिशत की तुलना में करीब 32 प्रतिशत अधिक मतदाताओं यानि 69.57 प्रतिशत ने मताधिकार का उपयोग किया जो अब तक का सर्वाधिक मत प्रतिशत है।
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वर्ष 2004 में 17 प्रतिशत गिर गया वोट का ग्राफ
चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र मत प्रतिशत बढऩे के साथ कुछ चुनाव में गिरावट के दौर भी आए। वर्ष १९९६ के लोकसभा चुनाव में वर्ष 1999 के चुनाव की तुलना में करीब १३ प्रतिशत कम 37.95 प्रतिशत मतदाताओं ने ही वोट डाले। दो चुनाव के मध्य मतदान प्रतिशत में सर्वाधिक गिरावट वर्ष 2004 के चुनाव में आई। वर्ष 1999 के चुनाव के 65.71 प्रतिशत की तुलना में 2004 के चुनाव में 48.34 प्रतिशत ने मताधिकार का उपयोग किया।
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Updated on:
12 Mar 2019 10:23 pm
Published on:
12 Mar 2019 10:23 pm
