5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जांच हो मुखिया की मुहर की तो सामने आ सकता कौनसा काला सच

अफीम खेती के लिए नारकोटिक्स विभाग और काश्तकार के बीच की कड़ी मुखिया के पद में मलाई नहीं होती तो कोई भी मुखिया बनना पसंद नहीं करता।
less than 1 minute read
Google source verification
chittorgarh

जांच हो मुखिया की मुहर की तो सामने आ सकता कौनसा काला सच



चित्तौडग़ढ़. अफीम खेती के लिए नारकोटिक्स विभाग और काश्तकार के बीच की कड़ी मुखिया के पद में मलाई नहीं होती तो कोई भी मुखिया बनना पसंद नहीं करता। घूस देकर मुखिया बनने का मामला उजागर होने के बाद अब यह साफ हो गया है कि मुखिया बनने के लिए घूस के रूप में 'इन्वेस्टमेंटÓ किया जा रहा है।मुखिया बनाने के लिए सीधा सा नियम है कि सर्वाधिक औसत देने वाले को मुखिया बनाया जाए, लेकिन इसके लिए तैयार होने वाला पांच किसानों का पैनल ही भ्रष्टाचार की राहें आसान कर रहा है। चित्तौडग़ढ़ में नारकोटिक्स विभाग के खण्ड प्रथम, द्वितीय और तृतीय में इस बार कुल ६६५ मुखिया बनाए गए है। जानकारों का कहना है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अब उन पैनल की जांच भी करने वाला है, जिसके आधार पर मुखियाओं का चयन किया गया था। पैनल में पहले नम्बर पर आने वाले कितने किसानों को मुखिया बनाया गया। यदि ऐसा नहीं किया गया तो किस कारण से पैनल में नीचे के नम्बरों पर शामिल किसानों को मुखिया बनाया गया। इन सब बातों की जांच में बहुत कुछ घालमेल सामने आने की संभावनाएं है।कोटा में नारकोटिक्स विभाग के उपायुक्त को घूस लेने के आरोप में पकडऩे के बाद से ही यहां नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों और मुखियाओं में खलबली मची हुई है। यहां अधिकारियों और मुखियाओं को अब यह चिन्ता सता रही है कि कहीं पिता को मुखिया बनाने के लिए उपायुक्त को घूस देते हुए पकड़ा गया कमलेश धाकड़ एसीबी के सामने कोई राज नहीं उगल दे। ऐसे में खुद पर गाज गिरने की आशंकाओं को लेकर अधिकारियों और मुखियाओं की नींद उड़ी हुई है।

बड़ी खबरें

View All

चित्तौड़गढ़

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग