31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Kamdhenu Pashu Bima Yojana : राजस्थान में पशुओं के बीमा पर ‘ब्रेक’, नई गाइड लाइन का इंतजार

Kamdhenu Pashu Bima Yojana : पशु बीमा योजना पशुपालकों के लिए आधार स्तंभ है। यदि पशु दुर्घटना का शिकार होता है तो उसके पालक को बीमा कंपनी की ओर से मदद मिलती है।

2 min read
Google source verification
Kamdhenu Pashu Bima Yojana

Kamdhenu Pashu Bima Yojana : चित्तौड़गढ़। राजस्थान में पशुपालकों के पशुओं के लिए शुरू हुई कामधेनु पशु बीमा योजना सरकार बदलते ही गोल हो गई हैं। यह योजना विधानसभा का चुनाव शुरू होने के कुछ समय पहले ही शुरू हुई थी। इस दौरान कुछ पशु पालकों से आवेदन लिए गए। लेकिन, जब तक इनको स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाता सरकार बदल गई। सरकार बदलते ही यह योजना अधरझूल में फंस गई।

अब नई सरकार ने इस योजना को लेकर अब तक कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया। जिसकी वजह से चित्तौड़गढ़ सहित राजस्थान के किसी भी जिले में पशुओं का बीमा नहीं हो रहा है। योजना संचालित रहने की स्थिति में चित्तौड़गढ़ जिले में दो लाख से ज्यादा पशु और प्रदेश में 1 करोड़ 39 लाख 37 हजार 630 गोवंश लाभान्वित हो सकते थे।

प्रति पशु इतना होता लाभ

कामधेनु पशु बीमा योजना में पंजीकृत पशु पालक परिवार के अधिकतम दो दुधारू पशुओं का 40 हजार रुपए प्रति पशु के हिसाब से बीमा किया जाना था। बीमा नि:शुल्क किया जाना था। इसके अलावा पशुओं की अधिकता की स्थिति में अन्य पशुओं का बीमा भी प्रावधानों के तहत सरकारी निर्देशानुसार किया जा सकता था।वर्ष 2023 के दिसंबर में कामधेनु बीमा योजना के शुरू होने के साथ ही प्रदेश के सभी जिलों के पशुपालन विभाग को पशुओं का बीमा करने के लिए दिशा-निर्देश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से जारी किए गए थे।

सभी जिलों के संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग को पशुपालकों के यहां जाकर बीमा करने की गाइडलाइन जारी की। लेकिन, इसके लिए अतिरिक्त भत्ता आदि देय नहीं होने से चिकित्सक हड़ताल पर चले गए। करीब सप्ताह भर बाद हड़ताल समाप्त तो हुई। लेकिन, तब तक चुनावी जाजम बिछनी शुरू हो गई। इस तरह से इस योजना पर फिर कोई काम ही नहीं हो पाया।

आवेदन मिले पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी

पशुपालन विभाग को जिलेवार पशुओं का बीमा कराने के लिए संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इस दौरान कई जिलों में कुछ आवेदन तो लिए गए। लेकिन, इन आवेदनों की न तो समुचित तरीके से स्क्रीनिंग हो पाई और न बीमा हो पाया। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में कुल बीमित पशुओं की संया महज 15 सौ से ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाई। अब पशु बीमा योजना के संदर्भ में नई गाइडलाइन जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। इसमें गोवंशों के साथ अन्य पशुओं को भी जोड़ा जाएगा।

यह भी पढ़ें : क्‍या बाघ की जगह गाय बनेगी राष्ट्रीय पशु? राजस्थान से शुरू होने जा रहा है ये बड़ा अभियान

राजनीतिक आंच पशुओं की बीमा योजना पर भारी

जानकार सूत्रों के अनुसार तत्कालीन राज्य सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई भामाशाह पशुधन बीमा योजना भी सरकार बदलते ही ठंडे बस्ते में चली गई थी। उसी तरह से वर्ष 2024 में कामधेनु योजना का हश्र हुआ। कुल मिलाकर सरकारें किसी की भी रहे, लेकिन नुकसान पशुपालकों का ही होता जा रहा।

बीमा योजना आधार स्तंभ

पशु बीमा योजना पशुपालकों के लिए आधार स्तंभ है। यदि पशु दुर्घटना का शिकार होता है तो उसके पालक को बीमा कंपनी की ओर से मदद मिलती है। पशुधन के विकास में भी पशु बीमा योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कामधेनु पशु बीमा योजना के तहत प्रत्येक पशु पालक को अधिकतम दो पशुओं के लिए प्रति पशु 40 हजार की सहायता राशि दी जानी थी। यह राशि समय पर मिलने पर पशुपालन की शृंखला बाधित नहीं होगी। ऐसी योजनाएं रुकनी नहीं चाहिए।

Story Loader

बड़ी खबरें

View All

चित्तौड़गढ़

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग