
देशी बोल पर थिरके विदेशी कदम
चित्तौडग़ढ़. मेवाड़ी भोजन का स्वाद, बैलगाडिय़ों की सवारी, पुष्प वर्षा, लोक संगीत पर थिरकन के बीच ग्रामीणों के आत्मीय स्नेह से अभिभूत विदेशी पर्यटकों ने मेवाड़ी संस्कृति का भरपूर आनंद लिया। तीन दिवसीय चित्तौड़ फोर्ट फेस्टिवल के अंतिम दिन बस्सी में आयोजित विलेज सफारी में पूरा बस्सी कस्बा विदेशी पांवणों के स्वागत में उमड़ पड़ा। मोली बंधन, तिलक, माला और साफा पहनाने के साथ ही हर ग्रामीण विदेशियों के साथ फोटो खिंचवाने को आतुर दिखा।विलेज सफारी में आए विदेशी मेहमानों ने बस्सी में स्थानीय संगतकारों की ढ़ोलक, मजिरों की धुन पर जमकर ठुमके लगाये। स्वागत सत्कार से अभिभूत पर्यटक समझ में न आने वाले गीतों के बोल पर स्थानीय लोगों के साथ जमकर नाचे। कलश बंधाओं रे, वीरों म्हारों आयो ऱे जैसे देशी शब्दों पर नाचते विदेशियों को देख दो संस्कृतियों का मिलन होता जान पड़ा। गीत-संगीत और भावनाओं का साम्य किसी भाषा, स्थान या रंग पर निर्भर नही करती यह इसका जीवंत प्रमाण था। दुसरी और पर्यटक भी इस आत्मीय अंदाज को देख उनके साथ अपनी खुद की सेल्फी लेने से नहीं रोक पाए। ग्रामीण संस्कृति का अद्भुत दृश्य देख उनकी सहजता चर्चा का विषय रही। विदेशी पर्यटकों ने बस्सी तालाब में नौका विहार का भी आनंद लिया। आयोजन स्थल पर कुंए की पनघट से पानी खिंचने और झुला झुलने का अनुभव भी प्राप्त किया।
विदेशी पावणों की थाली में देशी स्वाद
मेवाड़ी खान-पान की स्नेही मनुहार से अभिभूत पर्यटक अपने खाने के अनोखे अंदाज से भी चर्चा में रहे। किसी का बाटी खाने का अंदाज निराला था, तो किसी का लड्डू । पालकी मारकर खाना खाने में असहज पर्यटक उनमुक्त अंदाज में नजर आए। विदेशी मेहमानों के भोजन की मनुहार देशी अंदाज में की गई। बाजोट लगा पतल-दोनो में खाना परोसा गया। जिला कलक्टर शिवांगी स्वर्णकार, एसपी अनिल कयाल, अतिरिक्त कलक्टर (प्रशासन) दीपेन्द्र सिंह राठौर, सीईओ जिला परिषद् अंकितकुमार सिंह, प्रशिक्षु आईएएस सुशील कुमार आदि भी हाथों से परोसकर मेहमानों की मनुहार करते दिखे।
वैदिक परम्परा के साथ आधुनिकता
बस्सी तालाब के घाट पर भारतीय परम्परा से पर्यटक रूबरू होते नजर आए। आयोजको ने वैदिक मंत्रोचार के बीच भारत की समृद्ध परम्परा से सभी को अवगत करवाया। कई पर्यटकों ने तो पास ही स्थित मंदिर में भगवान की पुजा अर्चना भी की।
Published on:
13 Feb 2019 11:13 pm
