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मेवाड़ के ‘ग्रीन गोल्ड’ से किसान हो रहे मालामाल, कॉस्मेटिक और आयुर्वेद में बढ़ी डिमांड, 11 जिलों में पहुंची मिठास

Chittorgarh Custard Apple: मेवाड़ की जिस धरा ने कभी तलवारों की खनक सुनी थी, वहां के सीताफल की मिठास रेगिस्तान से लेकर मालवा तक घुल रही है। चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर निम्बाहेड़ा रोड स्थित प्रदेश का एकमात्र सीताफल उत्कृष्टता केन्द्र नवाचारों का ऐसा पर्याय बन चुका है, जिसकी धमक सरहदों के पार तक है।
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चित्तौड़गढ़

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Anand Prakash Yadav

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Updated: 14 Apr 2026, 12:53 PM IST

किसानों के लिए 'हरा सोना' बनी सीताफल की फसल, पत्रिका फोटो

किसानों के लिए 'हरा सोना' बनी सीताफल की फसल, पत्रिका फोटो

Chittorgarh Custard Apple: मेवाड़ की जिस धरा ने कभी तलवारों की खनक सुनी थी, वहां के सीताफल की मिठास रेगिस्तान से लेकर मालवा तक घुल रही है। चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर निम्बाहेड़ा रोड स्थित प्रदेश का एकमात्र सीताफल उत्कृष्टता केन्द्र नवाचारों का ऐसा पर्याय बन चुका है, जिसकी धमक सरहदों के पार तक है। यहां तैयार हो रहे उन्नत किस्म सीताफल के ग्राफ्टेड पौधों का जादू ऐसा चला है कि पिछले छह सालों में अकेले चित्तौड़गढ़ से करीब 21 हजार 707 पौधे प्रदेश के 11 जिलों सहित मध्यप्रदेश तक भेजे जा चुके हैं।

चित्तौड़गढ़ के 'पंच गौरव' में शामिल सीताफल

इस केंद्र में वैज्ञानिकों की देखरेख में ऐसे पौधे विकसित किए गए हैं, जिनमें बीज कम और पल्प (गुदा) अधिक होता है। पथरीली जमीन में भी लहलहाने वाली यह फसल किसानों के लिए 'हरा सोना' साबित हो रही है। चित्तौड़गढ़ के 'पंच गौरव' में शामिल सीताफल अब केवल एक फल नहीं, बल्कि ब्रांड बन चुका है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा से लेकर टोंक, जयपुर और एमपी के नीमच तक यहां के पौधों ने अपनी जड़े जमा ली है।

एक फल सवा किलो का, शोध में 31 किस्में तैयार

केन्द्र में वर्तमान में जहां 31 विभिन्न किस्मों पर काम हो रहा है। इसमें एनएमके-1 (गोल्डन) और सरस्वती जैसी किस्में हैं। सरस्वती किस्म का एक फल 500 ग्राम से 1.25 किलोग्राम तक होता है। एनएमके-दो, समृद्धि-दो, सिंधन, बालानगर, ऑटोमाया, रामफल, और अर्का सहन जैसी वैरायटीज यहां तैयार हैं, जो 3 से 4 साल में फल देने लगती हैं।

कॉस्मेटिक और आयुर्वेद में बढ़ी पूछ

सीताफल की डिमांड सिर्फ खाने की मेज तक सीमित नहीं है। प्रीमियम आइसक्रीम, शैक और रबड़ी के साथ-साथ अब कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में भी इसकी भारी मांग है। विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण फेस पैक, क्रीम और लीशन बनाने वाली कंपनियां भी इस केंद के संपर्क में हैं। वहीं मैग्नीशियम और पोटेशियम की प्रचुरता इसे हृदय और पाचन रोगों के लिए रामबाण आयुर्वेदिक औषधि बनाती है।

एक्सपर्ट ये बोले…

सीताफल के प्रति किसानों का लगातार रुझान बढ़ता जा है। इसके पौधे को कोई भी पशु नुकसान नहीं पहुंचाता है। रोग भी नहीं लगते हैं। पहले यह खेतों में मेढ़ पर ही लगता था, लेकिन अब इसके बगीचे लगने लग गए हैं। केन्द्र से कई जिलों में यहां से सीताफल के पौधे गए हैं। उसमें फल भी आ रहे हैं।
रमेश आमेटा, उपनिदेशक सीताफल उत्कृष्टता केन्द्र चित्तौड़गढ़