
खनन से चित्तौड़ के पर्यावरण को कितना नुकसान, ड्रोन से होगा सर्वेक्षण
चित्तौडग़ढ़. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) ने एतिहासिक चित्तौड़ शहर में खनन की वजह से हो रहे वायु प्रदूषण के नुकसान के आकलन के लिए ड्रोन से सर्र्वेक्षण कराने का आदेश दिया है। एनजीटी के आदेश से खनन के कारण एतिहासिक चित्तौड़ दुर्ग के लिए उत्पन्न खतरे के मुद्दें को फिर चर्चा में ला दिया है। एनजीटी के जस्टिस रघुवेंद्र एस राठौर की अध्यक्षता वाली बेंच ने नागरिक उड्डयन विभाग के महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वो सर्वेक्षण (सर्वे) महानिदेशक देहरादून को ड्रोन से सर्वेक्षण की अनुमति प्रदान करे। एनजीटी ने भारत के सर्वेक्षण महानिदेशक को ड्रोन से चित्तौडग़ढ़ का सर्वेक्षण कर एक जुलाई तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने कहा कि चित्तौडग़ढ़ शहर की आबादी करीब डेढ़ लाख है। चित्तौडग़ढ़ शहर के आसपास करीब 4 हजार 600 हेक्टेयर खनन के लीज है जिसमें 11.22 मिलीयन टन का सालाना उत्पादन होता है। शहर में छोटे-छोटे खनिजों का खनन इलाका 260 हेक्टेयर है जिसमें से 5.2 मिलियन टन का उत्पादन हर साल होता है। चित्तौडग़ढ़ शहर के 15 किलोमीटर के दायरे में स्टोन और खनिजों का खनन होता है। एनजीटी ने राजस्थान सरकार को नोटिस देकर अवैध खनन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर एनजीटी ने भारत के सर्वे महानिदेशक को सर्वे करने का निर्देश दिए है।
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खनन के कारण हो रहा पर्यटन प्रभावित
एनजीटी की बैंच ने कहा कि चित्तौडग़ढ़ में डेढ़ हजार वर्ष पुराना किला और करीब 150 से ज्यादा महाभारतकालीन मंदिर और स्मारक होने की वजह से यहां पर्यटकों का भी खूब आगमन होता है। एनजीटी ने पाया कि चित्तौडग़ढ़ में बड़े पैमाने पर खनन की वजह से यहां का पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावितहो रहा है और इससे यहां के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो रही हैं। गौरतलब है कि दुर्ग पर जनवरी २०१७ से लेकर दिसम्बर २०१८ तक करीब दस लाख देशी पर्यटकों और ४० हजार विदेशी पर्यटकों ने भ्रमण किया।
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उठती रही दुर्ग के परिधि क्षेत्र में खनन पर रोक की मांग
एनजीटी के इस आदेश से पहले भी चित्तौड़ के आसपास हो रहे खनन के कारण यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल चित्तौड़ दुर्ग को खतरा बताया जा रहा।चित्तौड़ दुर्ग के परिधि क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के लिए कई बार आदेश दिए गए लेकिन विभाग के सर्तक नहीं होने से ऐसी शिकायते निरन्तर आती रही। परिधि क्षेत्र के आसपास नए खनन आधारित उद्योग लगने से भी खतरा बढ़ गया।
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खनन का वन्य जीवन पर भी प्रभाव
चित्तौड़ के आसपास हो रहे खनन पर एनजीटी ने माना है कि इसके नजदीक बस्सी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है। ऐसे में वन्यजीवों एवं वहां के प्राकृतिक वातावरण पर भी इसका असर हो सकता है।
Published on:
09 Mar 2019 11:21 pm
