7 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान चुनाव 2023: कल से नामांकन, अब तक चार विधानसभा सीटों पर चुनावी तस्वीर साफ नहीं

Rajasthan Election : चित्तौड़गढ़ विधानसभा चुनाव को लेकर सोमवार से नामांकन भरने का काम शुरू होने जा रहा है लेकिन, जिले की चार विधानसभा सीटों पर अब भी चुनावी मुकाबला स्पष्ट नहीं हो पाया है।

2 min read
Google source verification
election_2023.jpg

Rajasthan Assembly Election 2023 : चित्तौड़गढ़ विधानसभा चुनाव को लेकर सोमवार से नामांकन भरने का काम शुरू होने जा रहा है लेकिन, जिले की चार विधानसभा सीटों पर अब भी चुनावी मुकाबला स्पष्ट नहीं हो पाया है। चित्तौडग़ढ़ सहित जिले में बेगूं, कपासन, बड़ीसादड़ी व निम्बाहेड़ा विधानसभा सीट हैं। भाजपा चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा व बड़ीसादड़ी में अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। जबकि, कांग्रेस ने अब तक सिर्फ निम्बाहेड़ा में प्रत्याशी घोषित किया है। जिले में अब तक सिर्फ निम्बाहेड़ा में ही चुनावी मुकाबला स्पष्ट हो पाया है। भाजपा को जहां कपासन व बेगूं से प्रत्याशी घोषित करने शेष हैं, वहीं कांग्रेस को अभी चार सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित करने हैं। इधर प्रदेश में सभी जिला निर्वाचन अधिकारी 30 अक्टूबर को अपने-अपने जिले में विधानसभा सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी करेंगे। नामांकन भरने का काम 30 अक्टूबर से 6 नवंबर तक होगा। 7 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 25 नवंबर को मतदान और 3 दिसंबर को मतगणना होनी हैं।

यह भी पढ़ें : राजस्थान चुनाव: निर्वाचन अधिकारी की पहल, पिछले चुनाव से बढ़ा मतदान प्रतिशत तो मिलेगा सम्मान

दावेदार और समर्थक बैचेन
इधर, प्रत्याशियों की सूचियां नहीं आने से दावेदारों और उनके समर्थकों में बेचैनी है। कार्यकर्ताओं के साथ आमजन भी प्रत्याशियों के नाम जानने को लेकर उत्सुक हैं। कुछ दावेदार टिकट को लेकर अब भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। कांग्रेस व भाजपा ने जिले में अब तक जिन प्रत्याशियों को मैदान में उतारा हैं, वह सब पुराने चेहरे हैं, जिन्हें चुनाव लडऩे का पुराना अनुभव है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा हैं कि कई सीटों पर बगावत और विरोध की आशंका के चलते भी उम्मीदवारों की घोषणा में देरी हो रही है।

यह भी पढ़ें : राजस्थान चुनाव: मतदान को लेकर आज भी इन बुजुर्ग महिलाओं में देखने को मिल रहा युवाओं जैसा जोश

जितना विलंब, उतना नुकसान
राजनीतिक दल प्रत्याशी घोषित करने में जितना विलंब करेंगे। प्रत्याशियों को उतना ही ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। समय कम मिलने के कारण प्रत्याशियों को विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक गांव और ढ़ाणी तक पहुंचने में परेशानी आएगी, वहीं बैनर-पोस्टर छपवाने में भी समय लगेगा।

मतदाता खिसकने का डर
प्रत्याशी चयन में देरी के कारण प्रचार के लिए एक-एक मतदाता से संपर्क करना मुश्किल होगा। विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या के अनुसार रोज कम से कम 6 से 9 हजार वोटरों से संपर्क करना होगा। एक मतदाता को एक मिनट भी नहीं दे पाएंगे। ऐसे में वे मतदाता िकसी भी ओर जा सकते हैं।