
Sanwaliya Seth: भंडार से निकले नोटों की गिनती करते मंदिर कर्मचारी (फोटो- पत्रिका)
चित्तौड़गढ़। जिले के मंडफिया स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में इस बार भी श्रद्धालुओं की आस्था खुलकर दिखाई दी। मंदिर के भंडार की सात चरणों में चली गिनती मंगलवार को पूरी हो गई। नकद दान, ऑनलाइन भेंट और मनीऑर्डर सहित मंदिर को एक महीने में कुल 38 करोड़ 23 लाख 13 हजार 862 रुपए की भेंट प्राप्त हुई। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने एक क्विंटल से अधिक चांदी और एक किलो से ज्यादा सोना भी अर्पित किया।
मंदिर बोर्ड अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव ने बताया कि 13 जुलाई को खोले गए भंडार की अंतिम चरण की गिनती मंगलवार को पूरी हुई। सातवें चरण में सिक्कों की गिनती की गई, जिसमें 8 लाख 33 हजार 905 रुपए प्राप्त हुए। इससे पहले छह चरणों में 29 करोड़ 68 लाख 83 हजार 955 रुपए की नकद राशि गिनी जा चुकी थी। सातों चरणों की गिनती पूरी होने के बाद भंडार और दानपेटियों से कुल 29 करोड़ 77 लाख 17 हजार 860 रुपए नकद प्राप्त हुए।
नकद चढ़ावे के अलावा देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन ट्रांसफर, मनीऑर्डर और मंदिर कार्यालय में सीधे भेंट के रूप में भी बड़ी राशि जमा कराई। इस माध्यम से मंदिर को 8 करोड़ 45 लाख 96 हजार 2 रुपए प्राप्त हुए। इस तरह नकद और ऑनलाइन भेंट को मिलाकर कुल चढ़ावा 38 करोड़ 23 लाख 13 हजार 862 रुपए तक पहुंच गया।
दानराशि के साथ श्रद्धालुओं ने सोना-चांदी भी बड़ी मात्रा में अर्पित किया। मंदिर प्रशासन के अनुसार भंडार, दानपेटियों और भेंट कक्ष से कुल 1 किलो 148 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना तथा 103 किलो 497 ग्राम चांदी प्राप्त हुई। मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार इनकी कीमत करोड़ों रुपए आंकी जा रही है।
मंदिर बोर्ड अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव ने बताया कि भंडार की गिनती पूरी पारदर्शिता के साथ सात चरणों में संपन्न कराई गई। इस दौरान मंदिर बोर्ड के सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर प्रबंधन, बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई।
राजस्थान ही नहीं, देशभर में आस्था का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले श्री सांवलिया सेठ मंदिर में हर महीने बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार भी करोड़ों रुपए की नकद भेंट के साथ बड़ी मात्रा में सोना और चांदी मंदिर को समर्पित किया गया। मंदिर प्रशासन का कहना है कि प्राप्त दानराशि का उपयोग मंदिर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक गतिविधियों के संचालन में किया जाएगा।
Updated on:
21 Jul 2026 10:19 pm
Published on:
21 Jul 2026 10:09 pm
