
खेतों में लहलहाती सूरजमुखी की फसल, पत्रिका फोटो
Agriculture Innovation: राजस्थान के कई जिलों में अब पारंपरिक खेती का तरीका बदल रहा है। कम पानी और कम लागत में सूरजमुखी किसानों के लिए एटीएम साबित हो रही है। चित्तौड़गढ़ जिले में बड़ी सादड़ी उपखंड के ओरवड़िया गांव में कट्स मानव विकास केंद्र और हैदराबाद के तिलहन संस्थान के सहयोग से शुरू हुआ यह प्रयोग अब जिले के 39 अन्य खेतों में सफलता की इबारत लिख रहा है। नजदीक के प्रतापगढ़ जिले में भी कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली सूरजमुखी की फसल किसानों को आकर्षित कर रही है।
| मानक | गेहूं/सरसों | सूरजमुखी |
|---|---|---|
| समय | 130-150 दिन | 90-110 दिन |
| सिंचाई | 5 से 6 बार | 2 से 3 बार |
| बाजार भाव (अनुमानित) | ₹5,000 - ₹5,500 | ₹6,500 - ₹7,000 (MSP आधारित) |
| शुद्ध लाभ | औसत | 20-30% अधिक |
जहां सूरजमुखी मुनाफा देती है, वहीं इसमें एक बड़ा जोखिम भी है। कृषि विशेषज्ञ दीपा इन्दोरिया के अनुसार इसके मीठे दानों की ओर तोते और अन्य पक्षी तेजी से आकर्षित होते हैं।
समाधान: किसानों को फसल पकने के समय खेतों में जाल लगाने पड़ते हैं या पारंपरिक तरीके से रखवाली करनी पड़ती है।
मिट्टी की सेहत: यह फसल मिट्टी से पोषक तत्व अधिक खींचती है, इसलिए अगली फसल के लिए हरी खाद का उपयोग जरूरी है।
सूरजमुखी का 'हेलियोट्रोपिज्म' गुण इसे खास बनाता है। पौधे के तने में 'ऑक्सिन' हार्मोन छाया वाली दिशा में जमा हो जाता है, जिससे वह हिस्सा बढ़ता है और फूल सूरज की ओर झुक जाता है। यह प्रक्रिया पौधे को अधिक ऊर्जा सोखने में मदद करती है।
डॉ. कौशल किशोर (आयुर्वेद विशेषज्ञ) बताते हैं कि यह केवल फसल नहीं, औषधीय खजाना है। इसमें मैग्नीशियम होता है, जो हड्डियों को मजबूती और मानसिक तनाव कम करता है। विटामिन-E से हृदय रोगों के खतरे को 40% तक कम करने में सहायक है। इसके दानों को भूनकर स्नैक्स के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
वर्तमान में इस फसल की सबसे बड़ी जरूरत स्थानीय स्तर पर 'ऑयल प्रोसेसिंग यूनिट' और 'खरीद केंद्रों' की है। यदि सरकार और प्रशासन मंडी में इसके लिए विशेष व्यवस्था करें, तो बड़ीसादड़ी का यह मॉडल पूरे राजस्थान में लागू हो सकता है।
Updated on:
06 Apr 2026 01:09 pm
Published on:
06 Apr 2026 01:08 pm
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