कहां हो रहा मीरा के दर्शन एवं भक्ति पर मंथन

कहां हो रहा मीरा के दर्शन एवं भक्ति पर मंथन

Nilesh Kumar Kathed | Publish: Sep, 08 2018 10:48:31 PM (IST) Chittorgarh, Rajasthan, India

मीरा की भक्ति का आधार समर्पण है। कृष्ण के प्रति समर्पण समग्र है, एकांश नही है। जब तक पूर्णता नहीं होगी कृष्ण नहीं मिलेंगे



चित्तौडग़ढ़. मीरा की भक्ति का आधार समर्पण है। कृष्ण के प्रति समर्पण समग्र है, एकांश नही है। जब तक पूर्णता नहीं होगी कृष्ण नहीं मिलेंगे। ये विचार शनिवार को चित्तौडग़ढ़ के सावंलिया विश्रान्ति गृह में इण्डियन कौसिंल ऑफ फिलोसोफिकल रिसर्च (आईसीपीआर) नई दिल्ली एवं मीरा स्मृति संस्थान चित्तौडग़ढ़ के तत्वावधान में मीरा: दर्शन और भक्ति पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के पहले दिन उभर कर आए। संगोष्ठी में मीरा के दर्शन एवं भक्ति से जुड़े विभिन्न पहलूओं पर मंथन किया जा रहा है। संगोष्ठी के उद्घाटन उद्बोधन में नालंदा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी बिहार के कुलपति प्रो. सुनयना सिंह ने कहा कि मीरा ने सब कुछ बिना शर्त कृष्ण के चरणों में रख दिया तब किसी बात की अस्वीकारोक्ति की गुंजाइश नहीं रह जाती है। उन्होने कहा बिना भक्ति के ज्ञान, वैराग्य में नहीं बदल सकता है। भक्ति ऐसे ही नहीं आ जाती है, जब वैराग्य उमड़ता है। उन्होंने मीरा और कृष्ण से जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि मीरा का एक तारा को लेकर गाना, नाचना सब कुछ तो कृष्ण के नाम था। राधा से भी अलग मीरा ने नाचते-गाते हुए अपनी भक्ति का जादू बिखरा।मीरा के ज्ञान मार्ग का संयोग भक्ति में होना ही मीरा की दार्शनिकता का बोध है। अध्यक्षता कर रहे भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के चेयरमैन में प्रो. एस आर भट्ट ने कहा कि हमें साहित्यिक विवेचन तक सीमित न रह कर दार्शनिक स्तर पर चिन्तन कर मीरा की तरह स्वानुभूति पर सौद्देश्य चिन्तन करना चाहिए।वार्ताकार प्रो. सत्यनारायण व्यास ने कहा कि मीरा काव्य में हृदय प्रधानता है, बुद्धि की नहीं। जीवत्मा परमात्मा का मिलन मीरा का भाव है। उदयपुर के परितोष दुग्गड़ कहा कि मीरा की रहस्यवादी दृष्टि उनकी भक्ति का आधार बनी।राजस्थान संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ जगदीश नारायण विजय ने बताया कि मीरा पर रविवार शाम 7 बजे मीरा नृत्य नाटिका तथा मीरा पदों की प्रस्तुतिया दी जाएगी। इससे पूर्व सांसद सी पी जोषी ने बाहर से आए हुए विद्वानों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि यह सेमिनार मीरा के दर्शन और भक्ति पर बहुआयामी चिन्तन और मंथन कर एक नई दिशा प्रदान करेगा। विधायक चन्द्रभान आक्या ने कहा कि मीरा अपनी भक्ति धारा के कारण जन-जन के हृदय में बसी है। नगर परिषद के अध्यक्ष सुशील शर्मा ने कहा कि यह राष्ट्रीय संगोष्ठी भारतीय जीवन मूल्यों को जीवन्त बनाएगी। प्रारंभ में मां सरस्वती की छवि एवं स्वामी आनन्द स्वरूप के चित्र पर माल्यापर्ण किया गया। अंजलि सेन ने ध्यान नृत्य नाटिका ने मनमोहक प्रस्तुति दी।
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मीरा इस जन्म की नहीं जन्म-जन्मान्तर से कृष्ण की
मुख्य अतिथि विष्णु स्वामी फाउण्डेशन चैन्नई के स्वामी हरिप्रसाद ने कहा कि मीरा अद्वितीय थी और भक्ति की जड़ों से जुड़ी रही। मीरा राजघराने की होते हुए भी जन साधारण की भाषा में भक्ति की रस धारा प्रभावित थी। उन्होंने भक्ति को 'अनन्य स्वरूपÓ तक विस्तृत बनाया। मीरा की भक्ति एक काल खण्ड और जन्म की नहीं जन्म जन्मान्तर की है, शाश्वत है जो जीवन में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
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कृष्ण भक्ति से ही अमृत में बदला विष का प्यालाा
प्रो. सुनयना सिंह ने कहा कि राज परिवारों में ब्याहना अलग है। उसका सांसारिक सुख, सुविधाओं से कोई लगाव न रख कर भक्तिमय हो जाना अलग बात है। विष का प्याला बिना कृष्ण भक्ति के अमृत में नहीं बदलता और न ही टोकरी में भेजा सर्प पुष्प माला में परिवर्तित होता है। भक्त शिरोणी आण्डाल तथा महाराष्ट्र की जानाबाई ने भी मीरा के समान ही भक्ति की धारा से जुड़कर भक्ति की संस्कृति में परिवर्तन की राहें बनाई। प्रो. कुसुम जैन ने कहा कि मीरा को गाया जा सकता है, नृत्य किया जा सकता है और भक्ति की धारा में डूबा जा सकता है किन्तु मीरा पर मीरामय हो कर चर्चा करना कठिन है।
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रविवार को होगी मीरा नृत्या नाटिका एवं व्याख्यान
सेमिनार के दूसरे दिन रविवार सुबह १० से दोपहर एक एवं दोपहर २.३० से शाम ५ बजे तक चर्चा सत्र के बाद शाम ७ बजे से राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी के सौजन्य से मीरा नृत्य नाटिका एवं व्याख्यान का आयोजन होगा। सेमिनार के अंतिम दिन सोमवार को सुुबह १० से दोपहर एक बजे तक चर्चा सत्र के बाद दोपहर २.३० बजे से समापन सत्र होगा। ये सत्र मुम्बई के गोस्वामी श्याम मनोहर के मुख्य आतिथ्य में होगा। अध्यक्षता राजस्थान संस्कृत अकादमी की अध्यक्ष डॉ. जया देव करेगी। विशिष्ट अतिथि आईसीपीआर चेयरमैन एसआर भट्ट एवं सदस्य सचिव रजनीश शुक्ल होंगे।

 

 

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