
मार्बल मण्डी में क्यों छाया सन्नाटा, राजमार्ग के ढाबो पर ग्राहकों का इंतजार
चित्तौडग़ढ़. विभिन्न मांगों को लेकर ट्रांसपोर्टर की हड़ताल का असर अब साफ दिखने लगा है। राजमार्गों पर दौडऩे वाले ट्रक सड़क किनारे लाइनों में खड़े है। ट्रकों के पहिये थमने का असर कारोबार जगत के साथ राजमार्ग पर चलने वाले उन व्यवसायों पर सर्वाधिक है जो ट्रकों से जुड़े हुए है। चित्तौडग़ढ़ में ट्रांसपोर्ट व्यवसाईयों के लोडिंग-अनलोडिंग बंद करने की सबसे अधिक मार मार्बल उद्योग पर पड़ी है। पहले ही मंदी की मार से जूझ रहे मार्बल उद्योग पर ट्रकों की हड़ताल का प्रतिकूल असर है। प्रतिदिन दो से तीन करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ट्रकों के नहीं चलने से यहां से मार्बल पत्थर अन्य स्थानों पर नहीं जा पा रहा है। रीको औद्योगिक क्षेत्र हो या आजोलिया का खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र दोनों ही तरफ मार्बल मण्डी में ट्रक नहीं चलने से सन्नाटा रहने लगा है। इकाईयों में उठाव नहीं होने का असर आने वाले दिनों में रेाजगार पर भी पड़ सकता है। ट्रक हड़ताल का असर राजमार्गों पर चलने वाले उन व्यवसायों पर भी पड़ रहा है जिनका सीधा जुड़ाव है। राजमागोंं पर ट्रक चालकों व खलासियों की आवक से आबाद रहने वाले ढाबे व होटलों पर भी सन्नाटा पसरने लगा है। पेट्रोल पम्पों की ग्राहकी पर भी असर आया है। राजमार्गों पर कई पम्पों पर मुख्य व्यवसाय ही ट्रकों से होता आया है ऐसे में उनके नहीं चलने से कारोबार बहुत कम रह गया है।
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चालीस-पचास से रह गई चार-पांच थाली
भीलवाड़ा फोरलेन मार्ग पर एक होटल पर हड़ताल के असर के बारे में पूछते ही वहां कार्यरत कर्मचारी कह उठे कि असर क्या कुछ भी काम नहीं रह गया है। पहले जहां प्रतिदिन ४५-५० थाली भोजन तैयार कर रहे थे वहां अब ४-५ थाली का काम भी नहीं रह गया है। यहां कई ढाबो व होटलों के पास वाहनों में हवा भरने का धंधा करने वाले भी खाली हाथ बैठे नजर आए।
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कई कारोबार पर अप्रत्यक्ष प्रभाव
ट्रक हड़ताल का कई कारोबार पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है। लोडिंग-अनलोडिंग बंद हो जाने से बाजार में आगे से माल की आवक कम हो गई है। ऐसे में हड़ताल लंबी खींचने पर बाजार में कई वस्तुओं की आपूर्ति घट जाने की आशंका है। हड़ताल के कारण राजमार्ग पर वाहनों की मरम्मत से लेकर छोटे-बड़े काम करने वाले भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए है।
Published on:
27 Jul 2018 10:37 pm
