
churu photo
चूरू. जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी (आरसीएचओ) डा. सुनील जांदू ने राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल के कुछ चिकित्सकों पर संगीन आरोप लगाए हैं। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सोमवार को एडीएम रामरतन सौंकरिया की अध्यक्षता में हो रही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की समीक्षा के दौरान डां. जांदू ने कहा कि जिला अस्पताल के कई डाक्टर खुद बीएसबीवाई के मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाते हैं और वहां ऑपरेशन भी करते हैं। इसकी वजह से सरकारी अस्पताल में इसकी स्तिथि दयनीय है। डाक्टर मरीजों व परिजनों को इसके लिए पूरी तरह मोटिवेट भी करते हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
इस पर एडीएम ने कहा कि इस स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो जिन अस्पतालों की स्थिति खराब है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिला अस्पताल में करीब ३५ फीसदी मरीजों को बीएसबीवाई का लाभ नहीं मिलना एक गंभीर मुद्दा है। भर्ती होने के बाद मरीजों को लाभ नहीं मिलना चिंता का विषय है। इससे अस्पताल के साथ मरीजों का आर्थिक नुकसान हो रहा है। एडीएम ने सीएमएचओ को राज्य स्तर की तरह जिला स्तर पर अस्पतालों की रैंकिंग करने का निर्देश दिया।
कुछ आशाएं गलत तरीके से उठा रही भुगतान
इस दौरान आरसीएचओ ने कहा कि कुछ आशाएं गलत तरीके से सरकार राशि का भुगतान उठा रही हैं। चूरू तहसील के एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रसव होने के बाद चौथी एएनसी जांच रजिस्टर में संधारित की गई। इसमें कुछ चिकित्सक व एएनएम भी शामिल हैं जो आशा की करतूतों पर ध्यान नहीं दे रहे। इस पर अंकुश लगाएं नहीं तो संबंधित को खमियाजा भुगतना पड़ेगा।
रैफर प्रसूताओं के प्रसव कराने पर उठा सवाल
इसी प्रकार अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. भंवरलाल सर्वा व आरसीएचओ जांदू ने चाड़वास आदर्श पीएचसी पर रेफर प्रसूताएं कराए जा रहे प्रसव का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि जहां जटिल प्रसव की सुविधा नहीं हैं वहां पर भी प्रसव करवाया जा रहा। सुजानगढ़ से गायनोलॉजिस्ट की ओर से रैफर प्रसूताओं के प्रशव कराए जा रहे हैं। यह गंभीर मुद्दा है। कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। प्रसूताओं की मौत में की गई समीक्षा में अधिकांश में यही पाया गया कि प्रसव के दौरान जटिलता का ध्यान नहीं दिया गया जरूरी उपचार नहीं दिया गया।
डा. सर्वा ने कहा कि रेफर करने से पहले मरीज की स्थिति देख लें और जो प्राथमिक उपचार होने चाहिए वह करके ही करें। रेफर प्रसूताओं के रेफर कार्ड देखकर ही उसको भर्ती ले यदि आपके के पास संशाधन व जानकारी नहीं है तो प्रसव नहीं कराएं। इस पर एडीएम ने कहा कि प्रसव सरकारी या निजी अस्पताल में हो लेकिन संस्थान में होना चाहिए। इसका विशेष ध्यान रखें। मुख्य चिकित्स एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मनोज शर्मा ने सभी चिकित्सा प्रभारियों से मरीजों के बेहतर सेवा देने का निर्देश दिया और कहा कि बिना संशाधन के बड़ा जोखिम नहीं उठाए और तुरंत मरीज को बडे चिकित्सा संस्थान के लिए रैफर करें। इस मौके पर अनेक चिकित्सक मौजूद थे।
Published on:
29 Aug 2018 10:06 pm
बड़ी खबरें
View Allचूरू
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
