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जयपुर-जोधपुर या कोटा-उदयपुर नहीं, देश के टॉप-10 रैंकिंग में आया राजस्थान का ये पुलिस थाना

जयपुर-जोधपुर नहीं, राजस्थान का यह थाना बना देश का गौरव, गृह मंत्रालय की उत्कृष्ट पुलिस थाना 2025 रैंकिंग के टॉप-10 में चूरू के रतननगर थाने ने मारी बाजी। जानें वजह।

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चूरू

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Nakul Devarshi

May 17, 2026

Best Police Station Ranking

Best Police Station Ranking

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से देश के सबसे बेहतरीन और जनता के प्रति जवाबदेह पुलिस स्टेशनों की राष्ट्रीय रैंकिंग 'उत्कृष्ट पुलिस थाना 2025' की घोषणा कर दी गई है। इस बार की रैंकिंग ने बड़े-बड़े पुलिस कप्तानों और महानगरों के थानों को चौंका दिया है। राजस्थान के खाते में आई 'कामयाबी' किसी बड़े शहर को नहीं, बल्कि चूरू जिले के रतननगर पुलिस थाने को मिली है, जिसने देश के सर्वश्रेष्ठ टॉप-10 थानों की सूची में शामिल होकर प्रदेश का सिर ऊंचा कर दिया है।

इस राष्ट्रीय मूल्यांकन में जहां पूर्वी दिल्ली का गाजीपुर थाना देश में पहले स्थान पर रहा, वहीं अंडमान निकोबार का पहाड़गांव थाना दूसरे और कर्नाटक का कविताल थाना तीसरे स्थान पर रहा। वहीं राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए चूरू के रतननगर थाने ने देश के शीर्ष 10 थानों में अपनी मजबूत धाक जमाई है।

इन कड़े मापदंडों पर हुआ टेस्ट

गृह मंत्रालय की इस प्रतिष्ठित योजना के तहत किसी भी थाने का चयन केवल वहां दर्ज होने वाले मुकदमों या कम अपराध के आधार पर नहीं किया जाता। इसके लिए कुल 19 बेहद कड़े पैरामीटर्स तय किए गए थे, जिन पर रतननगर थाने ने सौ फीसदी स्कोर हासिल किया:

इंफ्रास्ट्रक्चर और सफाई: थाने की बिल्डिंग का रख-रखाव, साफ-सफाई, पुलिसकर्मियों के लिए बैरक, भोजनालय (मेस), स्वच्छ पेयजल और बिजली कटने पर पावर बैकअप की पुख्ता व्यवस्था।

दिव्यांग और आमजन सुविधाएं: थाने में आने वाले दिव्यांग नागरिकों के लिए विशेष रैंप, व्हीलचेयर की सुविधा और साफ-सुथरे शौचालय।

तकनीकी सुदृढ़ीकरण: सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी, पारदर्शी मालखाना प्रबंधन, रिकॉर्ड रूम का आधुनिक कंप्यूटरीकरण और डिजिटल शिकायत प्रणाली का कुशल उपयोग।

अनुशासन और आंतरिक जांच: थाने के पुलिसकर्मियों का आपसी अनुशासन, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता, पुराने मामलों का त्वरित निपटारा और एसीबी (ACB) ट्रैप या किसी स्टाफ का निलंबन न होना जैसे कड़े बिंदु शामिल रहे।

तुरंत FIR कॉपी, व्यवहार बना सबसे बड़ा आधार

इस राष्ट्रीय सर्वे की सबसे खास बात यह रही कि इसका दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण पूरी तरह से 'जनसर्वे और पब्लिक फीडबैक' पर आधारित था। दिल्ली की खुफिया टीमों और स्वतंत्र सर्वेक्षकों ने गुप्त रूप से रतननगर क्षेत्र के शिकायतकर्ताओं, स्थानीय दुकानदारों, राहगीरों और आम निवासियों से सीधा संवाद किया:

सुरक्षा का अहसास: सर्वे में शामिल 91 प्रतिशत स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने बेबाकी से स्वीकार किया कि वे अपने क्षेत्र में पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं और रात की गश्त बहुत प्रभावी है।

पारदर्शिता में अव्वल: थाने में आए 95 प्रतिशत शिकायतकर्ताओं ने बताया कि पुलिस ने बिना किसी देरी या रिश्वत के उनकी शिकायत दर्ज की और उन्हें तुरंत एफआईआर (FIR) की रसीद या प्रति सौंपी।

पुलिस की भाषा: राहगीरों ने बताया कि रतननगर थाने के पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की भाषा और व्यवहार आम जनता के प्रति बेहद मददगार, विनम्र और सहयोगात्मक है, जो आम तौर पर पुलिस की छवि से बिल्कुल अलग है।

राजस्थान पुलिस मुख्यालय : नई गाइडलाइन

चूरू के रतननगर थाने की इस अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए राजस्थान पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी अन्य थानों के लिए एक विशेष गाइडलाइन जारी की है। अब राजस्थान के सभी जिलों के थानों को रतननगर मॉडल को अपनाना होगा।

केवल कागजों पर अपराध दर्ज करना पुलिस की दक्षता का पैमाना नहीं माना जाएगा। अब से पारदर्शिता, जवाबदेही, डिजिटल सेवाओं की सहजता और सबसे बढ़कर 'जन विश्वास' ही थानों के परफॉर्मेंस अप्रेजल का मुख्य आधार होगा।

कम्युनिटी पुलिसिंग की जीत

चूरू के रतननगर थाने की यह राष्ट्रीय रैंक यह साबित करती है कि अगर पुलिस प्रशासन की नीयत साफ हो और वे जनता को डराने के बजाय अपनी कार्यशैली में सुधार करें, तो सीमित संसाधनों में भी देश भर में अव्वल आया जा सकता है। रतननगर थाने की इस सफलता पर पूरे राजस्थान को नाज है और यह देश के बाकी पुलिस स्टेशनों के लिए एक बेहतरीन रोल मॉडल है।