11 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

चूरू
लॉटरी में नाम आने के बाद भी निशुल्क प्रवेश से वंचित रहेंगे हजारों बच्चे
Play video

लॉटरी में नाम आने के बाद भी निशुल्क प्रवेश से वंचित रहेंगे हजारों बच्चे

प्रवेश में रोस्टर प्रणाली तोड़ेगी जरूरत मंद अभिभावकों की उम्मीदें
Google source verification

चूरू

image

Piyush Sharma

Apr 15, 2019

चूरू. आरटीई के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश के लिए लॉटरी में चयन के बावजूद हजारों बच्चे इस बार भी प्रवेश से वंचित रहेंगे।
क्योंकि प्रवेश के लिए राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से तय रोस्टर प्रणाली अभिभावकों और बच्चों की उम्मीदें तोड़ेगी।

ऐसे में निर्धन अभिभावकों को अपने बच्चों को निजी स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए मजबूरन हजारों रुपए खर्च करने पड़ेंगे। या फिर सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाना पड़ेगा।

गौरतलब है कि नए शिक्षा सत्र में अपने बच्चों को निजी स्कूल में निशुल्क शिक्षा अधिनियम के तहत प्रवेश दिलाने के लिए प्राथमिक एवं सैकंडरी स्तर के स्कलों में 61 हजार 541 बच्चों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। जिनमें प्रारंभिक स्तर के 526 स्कूलों में 29 हजार 268 व सैकंडरी स्तर के 423 स्कूलों में 32 हजार 273 बच्चे हैं। मगर आरटीई के तहत बच्चों को निशुल्क शिक्षा के लिए प्रवेश एक तीन के अनुपात में दिया जाएगा। यानि एक आरटीई प्रवेश के बाद तीन सामान्य बच्चों को प्रवेश मिलेगा। ऐसे में सामान्य बच्चे कम होने पर स्कूल में आरटीई के कम बच्चों को प्रवेश मिलेगा। ऐसे में नंबर नहीं आने पर अभिभावक दूसरे स्कूल में आवेदन कर सकेंगे। वहां भी नंबर नहीं आने पर उन्हें अपने बच्चे को फीस देकर ही प्रवेश दिलाना पड़ेगा।


ये है रोस्टर प्रणाली


पहला बच्चा आरटीई का होगा। उसके बाद दो, तीन व चार नंबर पर सामान्य बच्चे का प्रवेश होगा। पांच नंबर पर आरटीई प्रवेश के बाद छह, सात व आठ नंबर पर सामान्य, नौवें नंबर पर आरटीई प्रवेश के बाद १०, 11 व 12वें नंबर पर सामान्य बच्चे का प्रवेश होगा। ऐसे में किसी स्कूल में यदि आरटीई के तहत प्रवेश के लिए चयनित १० बच्चों ने आवेदन किया है। और स्कूल में २० सामान्य बच्चों के प्रवेश हुए हैं तो आरटीई के पांच ही बच्चों का प्रवेश होगा। बाकी पांच को आरटीई के तहत प्रवेश से वंचित रहना पड़ेगा।


वार्ड के बच्चे को मिलेगी प्राथमिकता


आरटीई के नियमानुसार निजी स्कूल अन्य क्षेत्र के बच्चों की बजा अपने वार्ड के चयनित बच्चे को प्रवेश देने के लिए बाध्य होंगे। कई बार अभिभावक ई-मित्र पर आवेदन करते समय अपना निवास स्थान वार्ड भी स्कूल के वार्ड में ही लिखवा देते हैं। ताकि प्रवेश आसानी से हो सके। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को ये देखना होगा कि बच्चा उसके वार्ड का है या नहीं। उसके वार्ड का चयनित कोई बच्चा प्रवेश से वंचित तो नहीं रह रहा है।


प्रारंभिक स्कूलों में आरटीई के लिए चयनित बच्चे


तहसील बच्चे
बीदासर 2859
चूरू 4802
राजगढ़ 3181
रतनगढ़ 1785
सरदारशहर 8724
सुजानगढ़ 6603
तारानगर 1314
कुल 29268

माध्यमिक स्कूलों में आरटीई के लिए चयनित बच्चे


तहसील बच्चे
बीदासर 2058
चूरू 4715
राजगढ़ 6547
रतनगढ़ 3613
सरदारशहर 4716
सुजानगढ़ 8517
तारानगर 2107
कुल 32273

आरटीई में चयन होना निजी स्कूल में बच्चे के निशुल्क प्रवेश की गारंटी नहीं है। रोस्टर प्रणाली में नाम आने पर ही प्रवेश मिल सकता है। अभिभावक आवेदन करते समय 15 स्कूलों के नाम भर सकते हैं।


-संपत बारूपाल, डीईओ
प्रारंभिक, चूरू