
चूरू/सांखू फोर्ट. रंगों का त्यौहार होली (Holi 2024) की अब अंचल में रंगत छाने लगी। घरों में होलिका दहन के लिए बनाए जाने वाले बड़कुले बनाने का क्रम शुरू हो गया है। अपने अपने अंदाज में होली मनाए जाने को लेकर लोग पर्व की तैयारियों में जुट गए है, तो सार्वजनिक स्थनों पर चंग की थाम और धमाल की गूंज सुनाई देने लगी है। भले ही होली त्यौहार पर आधुनिकता का परिवेश नजर आ रहा है लेकिन ग्रामीण अंचलों में आज भी पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया जा रहा है।
कस्बे में बुधवार को बड़कुले बनाने वाली संतोष प्रजापत, माया कंवर, सीमा निमीवाल, मायावती, सुमन सावंत्री, सुशीला, सुनीता, मोनिका तथा सुमित्रा का कहना है कि होलिका दहन के समय बड़कुलों की जेळमाला बनेंगी जिसमें होलिका की प्रतिकात्मक प्रतिमा भी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में होली के करीब दस से बारह दिन पहले से ही बनने शुरू हुए बड़कुले के बाद एकादशी के दिन घरों में ढाल, तलवार, चांद, सूरज व नारियल बनाए जाएंगे। जिनकी पूर्णिमा के दिन माला बनाकर पूजा अर्चना कर उनको भोग लगाया जाएगा और बाद शुभ मूहर्त में होलिका का दहन किया होगा।
गुलाल से खेलते है होली
सांखू फोर्ट की रेखा शर्मा कहती है कि यह उत्साह और उमंग का पर्व है होली। हंसी ठिठोली के साथ मानए जानेवाले इस पर्व का इंतजार रहता है। वे बाजार में आनेवाली गुलाल से होली खेलते हैं। अच्छे किस्म की गुलाल से किसी को कोई नुकसान नहीं होता हैं।
होलीका दहन के बाद गणगौर
सुशीला जांगिड़ कहती है रंगों का त्यौहार होली हमारी सनानत संस्कृति का अभिनव पर्व है। मातृ शक्ति होली पर्व पर होलिका दहन के बाद गणगौर पूजन शुरू करती है तो गांव की सुबह मंगल गीतों से गूंठ उठती है।
Published on:
14 Mar 2024 10:41 am
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