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110 साल पुराने महादेव मंदिर में स्थापित हैं 12 शिवलिंग, सावन में जुटते हैं लाखों श्रद्धालु, दर्शन मात्र से पूरी होती मनोकामना

Rajasthan Famous Shiva Temple: गढ के उत्तर की ओर स्थित बारह महादेव मंदिर अद्भुत है। यहां के बाशिंदों को बारह ज्यार्तिलिंगों के दर्शन करने बाहर नहीं जाना पड़े। भामाशाह गणपतराय खेमका ने शहर में ही मंदिर बनवा दिया।

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चूरू

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Nupur Sharma

Aug 07, 2023

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चूरू@ पत्रिका। Rajasthan Famous Shiva Temple: गढ के उत्तर की ओर स्थित बारह महादेव मंदिर अद्भुत है। यहां के बाशिंदों को बारह ज्यार्तिलिंगों के दर्शन करने बाहर नहीं जाना पड़े। भामाशाह गणपतराय खेमका ने शहर में ही मंदिर बनवा दिया। करीब तीन पीढीयों से मंदिर की सार संभाल कर रहे पंडित सुनील मिश्र ने बताया कि प्राचीन मंदिर राजस्थान की स्थापत्य कला का प्रतीक है। इसका निर्माण विसं 1968 में करवाया गया था। मंदिर करीब 110 साल पुराना है। मंदिर में 12 शिवलिंग मंदिर बनाकर स्थापित किए गए हैं। मंदिरों के गर्भगृह में देवी पार्वती व नंदी विराजित हैं।

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खास बात है कि सभी शिव मंदिरों की श्रद्धालु आधी परिक्रमा ही कर सकते हैं। इसके अलावा मंदिर में लड्डू गोपाल, गणेश व शालीग्राम भी स्थापति किए हुए हैं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि सावन में यहां भक्तों की भीड़ जुटती है। श्रद्धालु जलाभिषेक व रूद्राभिषेक से भगवान आशुतोष को रिझाते हैं। महाशिवरात्रि पर मंदिर की खास सजावट की जाती है। कई आयोजन होते हैं।

12 ज्योर्तिलिंगों की परिक्रमा के बाद शिवलिंग स्थापित किए
मंदिर के निर्माण को लेकर अनूठी कहानी सामने आई। मंदिर के पुजारी पंडित सुनील मिश्र ने बताया कि पुराने जमाने में यातायात के साधनों के अभाव में श्रद्धालु ज्योर्तिलिंगों के दर्शन करने नहीं जा पाते थे। यही वजह थी कि भामाशाह गणपतराय खेमका ने मंदिर का निर्माण करवाया। इसमे सबसे रौचक तथ्य तो ये है कि मंदिर में ही शिवलिंग तराशे गए। इसके बाद सभी शिवलिंगों को सनातन आस्था के तौर पर प्रसिद्ध 12 ज्योर्तिलिंगों की परिक्रमा करवाई गई। इसके बाद 12 मंदिर बनवाकर इनकी प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई।

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भक्तों की पूरी करते मनोकामना
पंडित सुनील मिश्र के मुताबिक शहर के भक्तों की 12 महादेव मंदिर को लेकर अटूट आस्था है। श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मंदिर में दर्शन करने से देश के सभी ज्योर्तिलिंगों की परिक्रमा का फल मिलता है। पंडित मिश्र के मुताबिक मंदिर में भगवान की पूजा करने शहर के सभी हिस्सों से भक्त आते हैं। अब मंदिर का भवन जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। कोई भामाशाह आगे आए तो मंदिर का पुर्ननिर्माण हो। ताकि प्राचीन विरासत को सहेजा जा सके।