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Acharya Mahashraman- चातुर्मास का समय ज्ञानार्जन के लिए अति महत्वपूर्ण: आचार्य महाश्रमण

चूरू (छापर). अष्टम आचार्य कालूगणी की जन्मधरा पर गुरुवार को चातुर्मास के प्रथम दिवस पर आचार्य महाश्रमण ने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि साधु के पास ज्ञान हो और समझाने की विधा हो तो कितनों का कल्याण हो सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि आगमी की वाणी किसी भी प्रकार से कानों में पड़े तो कल्याण हो सकता है।

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चूरू

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Vijay

Jul 15, 2022

Acharya Mahashraman- चातुर्मास का समय ज्ञानार्जन के लिए अति महत्वपूर्ण: आचार्य महाश्रमण

Acharya Mahashraman- चातुर्मास का समय ज्ञानार्जन के लिए अति महत्वपूर्ण: आचार्य महाश्रमण

अष्टम आचार्य कालूगणी की जन्मधरा पर चातुर्मास
चूरू (छापर). अष्टम आचार्य कालूगणी की जन्मधरा पर गुरुवार को चातुर्मास के प्रथम दिवस पर आचार्य महाश्रमण ने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि साधु के पास ज्ञान हो और समझाने की विधा हो तो कितनों का कल्याण हो सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि आगमी की वाणी किसी भी प्रकार से कानों में पड़े तो कल्याण हो सकता है। सुनकर आदमी कल्याण को जाने और बुरे कार्यों को छोडऩे का प्रयास करे। आगमवाणी से यदि किसी का हृदय परिवर्तन होता है तो उसके दो लाभ प्राप्त होते हैं। एक तो बुरे कार्यों में लगे हुए उस व्यक्ति की आत्मा का सुधार हो जाता है और दूसरे किसी का धन बच जाए, किसी के प्राणों की रक्षा भी हो जाती है। आगमवाणी का अपना महत्त्व भी है। उसके मनन से, पाठन और श्रवण से कल्याण हो सकता है। आगम के अध्ययन का अपना विधान भी है। चतुर्मास का समय ज्ञानार्जन के लिए महत्त्वपूर्ण होता है। मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के माध्यम से नित्य श्रुताराधना की जा सकती है। साथ ही यदि सामायिक आदि भी हो जाए तो अच्छा लाभ प्राप्त हो सकता है। प्रवचन, पाथेय अच्छा पोषण देने वाला हो सकता है।

इस बार भगवती सूत्र वाचन का विचार
आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को छापर चतुर्मास में भगवती सूत्र के आधार पर कहा कि इस बार भगवती सूत्र पर प्रवचन करने का विचार है। इसके उपरान्त जितना समय प्राप्त हो सकेगा, कालूयशोविलास का भी व्याख्यान दिया जा सकता है। आगम आधारित प्रवचन लोगों को अच्छी खुराक देने वाली बन सकती है। मंगल प्रवचन के उपरान्त मुनि विकासकुमारजी ने गीत के माध्यम से पूज्यचरणों में अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति अर्पित की।

धर्म सभा का आयोजन
चूरू. तेरापंथ आद्य प्रवर्तक आचार्य भिक्षु ने अंधेरी ओरी से अध्यात्म का उजाला दिया था। उनके द्वारा स्थापित तेरापंथ धर्म संघ अध्यात्म जगत में पथ प्रदर्शक बना हुआ है। उक्त विचार सादुलपुर में साध्वी सूर्य यशा ने बुधवार रात्रि को मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। जसकरण सुराणा हवेली में आयोजित विशेष धर्म समारोह आचार्य महाश्रमण की वरिष्ठ शिष्या शासनश्री साध्वी विद्यावती प्रथम के सानिध्य में कार्यक्रम हुआ। साध्वी सूर्य यशा ने तेरापंथ स्थापना और धर्म संघ की विस्तृत व्याख्या की। साध्वी विद्यावती ने श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया। साध्वी प्रशस्त प्रभा के संयोजन में हुए कार्यक्रम में मुकेश गधैया, पीयूष सुराणा तथा श्याम जैन ने भी विचार व्यक्त किए। बाल श्रावक श्राविकाओं को जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा के मंत्री हनुमान सुराणा ने पुरस्कार प्रदान किए। इससे पूर्व आचार्य भिक्षु बोधि दिवस तथा तेरापंथ स्थापना दिवस के उपलक्ष में अखंड जप ध्यान और स्वाध्याय का कार्यक्रम चला।


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