
तमिलनाडु के 25 वर्षीय भारतीय ग्रैंडमास्टर्स अराविंद चितंबरम अपना पहला मेजर खिताब जीतने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने लुसाने खेले जा रहे प्राग मास्टर्स चेस टूर्नामेंट के आठवें राउंड में चेक गणराज्य के डेविड नवारो के खिलाफ दबदबा कायम रखते हुए आसान ड्रॉ खेला। इसके साथ ही उन्होंने 5.5 अंकों के साथ एकल बढ़त हासिल कर ली है। इस टूर्नामेंट में कुल नौ बाजी खेली जानी है। अराविंद को आखिरी बाजी तुर्की के ग्रैंडमास्टर इदीज गुरेल के साथ खेलनी है और खिताब जीतने के लिए उन्हें सिर्फ ड्रॉ की दरकार है।
भारत के ही युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रग्गनानंदा पांच अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने शुक्रवार को वियतमान के क्यांग लियाम ली के साथ बाजी ड्रॉ खेली। अब उन्हें आखिरी दौर में नीदरलैंड्स के दिग्गज खिलाड़ी अनीश गिरी के साथ खेलना है। वहीं, पहले तीन में से दो मैच हारने वाले चीन के टॉप सीड वेई यी ने जीत हासिल कर तीसरे स्थान पर 4.5 अंकों के साथ एकल बढ़त बना ली है। अब स्थानीय खिलाड़ी गुयेन थाई को हराया।
अराविंद तमिलनाडु के मदुरै के थिरुनगर के रहने वाले हैं। उनके लिए बचपन बेहद मुश्किल रहा क्योंकि जब वह सिर्फ तीन साल के थे, तब उनके पिता का देहांत हो गया था। उनकी मां ने लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी की और बेटे का पालन पोषण किया।
अराविंद को चेस खिलाड़ी बनाने का श्रेय उनके नाना को जाता है। हालांकि अराविंद को क्रिकेट पसंद था और वह बाहर बच्चों के साथ खेलने की जिद करते थे। लेकिन उनके नाना चाहते थे कि वह घर पर ही रहें। ऐसे में उन्होंने अराविंद के सात साल की उम्र में चेस सिखाना शुरू किया।
सिर्फ 12 साल की उम्र में अराविंद ने पहली बड़ी सफलता हासिल की और अंडर-19 चेस चैंपियनशिप जीती। साल 2012 में वह अंडर-14 वल्र्ड चेस चैंपियनशिप में दूसरे स्थान पर रहे।
Published on:
08 Mar 2025 10:45 am
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