
गौतम गंभीर (फोटो-IANS)
Amit Mishra support to Gautam Gambhir: भारतीय टीम के हेड कोच के तौर पर गौतम गंभीर का व्हाइट बॉल और रेड बॉल क्रिकेट में आंकड़े एकदम विपरीत रहे हैं। व्हाइट बॉल क्रिकेट में खासतौर पर टी20 में आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे को छोड़ दें तो भारत एक ऐसी टीम रही है, जिसे हराना मुश्किल है। टीम इंडिया 2024 से 2026 टी20 वर्ल्ड कप के बीच कोई टी20 सीरीज नहीं हारी। वनडे में भी भारत ने 2025 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती। लेकिन, गंभीर की कोचिंग में भारतीय टीम के लिए सबसे बुरा दौर टेस्ट क्रिकेट में रहा है। इसके बावजूद पूर्व स्पिनर अमित मिश्रा ने गंभीर का सपोर्ट करते हुए बीसीसीआई से उन्हें और समय देने की मांग की है।
गंभीर के अंडर टेस्ट में बेहद खराब रिकॉर्ड के बावजूद भारत के पूर्व लेग-स्पिनर अमित मिश्रा ने गंभीर का सपोर्ट करते हुए टीओआई के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि कोच के लिए यह मुश्किल है। मुझे लगता है कि खिलाड़ियों को ज्यादा जिम्मेदारी लेने की जरूरत है। सभी फॉर्मेट के लिए एक कोच सालों से आम बात रही है। आपको किसी भी कोच को समय देना होगा। टेस्ट मैचों में हमारे पास कम अनुभव वाले नए खिलाड़ी होते हैं। कोच और खिलाड़ियों को डेवलप होने में समय लगता है।
उन्होंने आगे कहा कि राहुल द्रविड़ को खुद को जमाने में एक से डेढ़ साल लगे। फिर परफॉर्मेंस बेहतर हुई। खिलाड़ियों को जिम्मेदारी लेने और विकेट के बर्ताव को समझने की जरूरत है। आप 140-145 करोड़ लोगों में से चुने जाते हैं, आपको विकेट और सिचुएशन के हिसाब से खुद को ढालना होता है। इसीलिए आप टॉप पर खेल रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि कोच को कोई दोष देना चाहिए।
मिश्रा ने कहा कि गंभीर को रेड-बॉल में समय दें। उन्हें नए खिलाड़ियों को समझाने की जरूरत है। एक कोच का काम मेंटल पहलुओं, स्किल्स पर काम करना है, लेकिन खिलाड़ियों को खेलना होगा। हमारे समय में खिलाड़ी ऐसा करते थे। आपको स्ट्रेस लेना होगा, समझना होगा। आपको समय बिताना होगा, सिचुएशन, खिलाड़ी, बॉलर, विकेट के हिसाब से बदलना होगा। एक कोच का काम गाइड करना, प्लान बनाना है, लेकिन खिलाड़ियों को एग्जीक्यूट करना होगा।
गंभीर की कोचिंग में भारतीय टीम का अभी तक बैटिंग ऑर्डर भी सेट नहीं हो सका है। खासकर नंबर तीन पर, जिसमें करुण नायर, साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल और यहां तक कि वाशिंगटन सुंदर को भी आजमाया गया। इस पर मिश्रा का मानना है कि गंभीर और टीम मैनेजमेंट को खुद को साबित करने के लिए कुछ और समय दिया जाना चाहिए। हम यहां ऐसा नहीं देखते, लेकिन वे उनके साथ नेट्स में समय बिताते हैं और देखते हैं कि कौन अच्छी बैटिंग कर रहा है और कौन नहीं। उनके दिमाग में यह बात होती है।
हम सिर्फ बदलाव देखते हैं। विकेट, सिचुएशन के हिसाब से, शायद सुंदर फिट हो रहे थे, इसलिए उन्होंने उन्हें वहां (साउथ अफ्रीका सीरीज में नंबर तीन पर) रखा। वे देखते हैं कि कौन अच्छी बैटिंग करता है, कौन अच्छी बॉलिंग करता है। वे टेस्ट में 11 के लिए सबसे अच्छा कॉम्बिनेशन ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें समय दें।
दरअसल, जब से गंभीर ने हेड कोच का पद संभाला है, तब से भारत ने छह टेस्ट सीरीज खेली हैं, जिनमें से सिर्फ दो सीरीज जीती हैं।
भारत ऑस्ट्रेलिया में 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 3-1 से हारा और 2025 में इंग्लैंड में सीरीज 2-2 से ड्रॉ की। लेकिन, सबसे बुरी बात यह है कि इंडिया दो होम सीरीज हार चुका है, वो भी क्लीन स्वीप के साथ 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 3-0 से और 2025 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2-0 से। कुल मिलाकर जब से गंभीर हेड कोच बने हैं, भारत ने 19 टेस्ट में से सात टेस्ट जीते हैं और 10 हारे हैं और अफगानिस्तान के साथ एकमात्र टेस्ट को छोड़कर दो ड्रॉ कराए हैं।
अब 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो मैचों की सीरीज में श्रीलंका के साथ श्रीलंका में खेलना है। इसके बाद दो मैचों की सीरीज के लिए न्यूजीलैंड जाना है और फिर 2027 की शुरुआत में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के लिए भारत आएगी। 48.15 पीसीटी के साथ भारत वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 की पॉइंट्स टेबल में पांचवें नंबर पर है और इस बात की बहुत ज्यादा संभावना है कि वे लगातार दूसरे चक्र में भी फाइनल में नहीं पहुंच पाएंगे।
Updated on:
13 Aug 2026 08:08 am
Published on:
13 Aug 2026 08:07 am
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