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MS Dhoni के खिलाफ मानहानि केस में अगली सुनवाई 29 जनवरी को, हाईकोर्ट ने कहा- धोनी को भेजें ये सूचना

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को अपनी रजिस्ट्री को भारतीय टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी को ये सूचना देने के निर्देश दिए हैं कि उनके दो पूर्व कारोबारी साझेदारों मिहिर दिवाकर और उनकी पत्नी सौम्या दास ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को अपनी रजिस्ट्री को भारतीय टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी को ये सूचना देने के निर्देश दिए हैं कि उनके दो पूर्व कारोबारी साझेदारों मिहिर दिवाकर और उनकी पत्नी सौम्या दास ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह ने कहा कि वादी पक्ष द्वारा धोनी को याचिका नहीं दी गई है और उन्हें सूचना जारी करना उचित समझा गया। अदालत ने रजिस्ट्री को दिए गए ईमेल पते पर धोनी को एक ईमेल भेजने और उनका प्रतिनिधित्व करने वाली कानूनी फर्म को भी सूचित करने को कहा। इस मामले की आगे की सुनवाई अब 29 जनवरी को होनी है।

दरअसल, मिहिर दिवाकर और उनकी पत्नी सौम्या दास ने 15 करोड़ रुपये के कथित अवैध लाभ और 2017 के अनुबंध के उल्लंघन के संबंध में कथित मानहानिकारक बयानों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से धोनी के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा और क्षतिपूर्ति की मांग की है। यह वाद विभिन्न प्रमुख प्लेटफार्मों जैसे कि एक्स, गूगल, यूट्यूब, मेटा (फेसबुक) और कई समाचार आउटलेट्स के खिलाफ भी है, ताकि वे उनके खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक लेख और पोस्ट हटा सकें।

16 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप

बता दें कि धोनी ने हाल ही में दिवाकर और दास के खिलाफ एक आपराधिक मामला दायर किया था, जिसमें उन पर क्रिकेट अकादमियों की स्थापना के अनुबंध का सम्मान न करके लगभग 16 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कथित तौर पर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी अरका स्पोर्ट्स के दो निदेशकों के खिलाफ रांची की एक अदालत में आपराधिक मामला दायर किया है।

धोनी के वकील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छवि खराब की!

यह अनुबंध धोनी और दिवाकर तथा दास की स्वामित्व वाली कंपनी अरका स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के बीच हुआ था। यह अनुबंध भारत और विश्व स्तर पर क्रिकेट अकादमियों की स्थापना के लिए था। दिवाकर का दावा है कि धोनी के वकील ने 6 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन पर और उनकी पत्नी पर नुकसान पहुंचाने वाले आरोप लगाए थे। पूर्व-व्यावसायिक साझेदारों का तर्क है कि मीडिया में व्यापक रूप से सामने आए इन आरोपों ने दिवाकर की छवि को धूमिल किया है।