
पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर। (इनसेट में) काव्या मारन। (फोटो सोर्स: IANS)
Sunil Gavaskar lashes out Kavya Maran Sunrisers Leeds: 'द हंड्रेड' ऑक्शन में पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को खरीदने पर सनराइजर्स लीड्स और काव्या मारन को लगातार कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का कहना है कि उन्हें जिस तरह की आलोचना का सामना करना पड़ा है, वह समझ में आने वाली बात है, खासकर दोनों देशों के बीच हाल के हालात को देखते हुए। काव्या सनराइजर्स लीड्स ने अबरार को करीब 2.3 करोड़ में साइन किया है। इस फैसले का सोशल मीडिया पर जबरदस्त विरोध हो रहा है। लोगों का कहना है कि पिछले साल पहलगाम में जो कुछ हुआ, उसके बावजूद उन्होंने एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को क्यों चुना।
सुनील गावस्कर ने भी उम्मीद के मुताबिक, इस पर काफी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लोगों को भारत के साथ पाकिस्तान के तनावपूर्ण इतिहास की याद दिलाई। 2008 के मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तानी क्रिकेटरों को आईपीएल से बैन कर दिया गया था। 11 साल बाद 2019 का पुलवामा हमला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि भारतीय क्रिकेट ने पाकिस्तान से दूरी क्यों बनाए रखी है।
गावस्कर ने पहलगाम आतंकी हमले का हवाला देते हुए यह तर्क दिया कि किसी पाकिस्तानी क्रिकेटर पर खर्च किया गया पैसा परोक्ष रूप से भारतीय नागरिकों की मौतों का कारण बनता है।
गावस्कर ने मिड-डे के लिए लिखे कॉलम में बताया कि पाकिस्तानी खिलाड़ी को दी गई फीस, जिसमें से वह अपनी सरकार को टैक्स देता है और उस पैसे से सरकार हथियार खरीदती है, परोक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौतों का कारण बनती है। इसी वजह से भारतीय संस्थाएं अब पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल करने के बारे में सोचना भी बंद कर चुकी हैं।
ज्ञात हो कि कुछ समय पहले ही बीसीसीआई ने केकेआर को निर्देश दिया था कि वे बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज कर दें, क्योंकि बांग्लादेश में कई हिन्दुओं की निर्मम हत्या कर दी गई थी। अगर इस तरह का फैसला लिया जा सकता है, तो सनराइजर्स लीड्स के साथ हुआ यह विवाद इस बात को और भी मजबूती से साबित करता है कि भारतीय क्रिकेट में हिंसा या अपने ही नागरिकों को निशाना बनाकर की जाने वाली हत्याओं के लिए कोई जगह नहीं है।
गावस्कर ने कहा कि चाहे पेमेंट करने वाली संस्था भारतीय हो या उसी संस्था की कोई विदेशी सब्सिडियरी, अगर मालिक भारतीय है, तो वह भारतीय हताहतों में योगदान दे रहा है। बात इतनी ही सीधी है। 'द हंड्रेड' टीम के कोच डेनियल विटोरी, जो न्यूजीलैंड से हैं, शायद इस सीधी-सी बात को न समझ पाए हों और इसलिए शायद वे अपनी टीम में कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ी चाहते हों।
लेकिन, निश्चित रूप से मालिक को तो स्थिति की समझ होनी चाहिए थी और उन्हें इस खरीद के लिए मना करना चाहिए था। क्या किसी ऐसे फॉर्मेट में टूर्नामेंट जीतना, जिसे कोई दूसरा देश नहीं खेलता, भारतीय लोगों की जान से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है?
Published on:
16 Mar 2026 01:50 pm
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