2 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कभी ड्रेसिंग रूम सिर्फ सिगरेट से महकता था, वर्ल्ड कप जीतने के बाद कप्तान के साथ खड़ा होकर फूंक रहा था ये भारतीय खिलाड़ी

90 के दशक तक सिगरेट कंपनियां क्रिकेट को खुलेआम स्पॉन्सर करती थीं। विल्स, बेंसन एंड हेजेस जैसे ब्रांड्स के होर्डिंग्स हर स्टेडियम में चारों तरफ दिखते थे। खिलाड़ी अगर सार्वजनिक रूप से सिगरेट पीते नजर आ जाते, तो उनकी मर्दानगी और कूलनेस में और इजाफा माना जाता था।

3 min read
Google source verification

भारत

image

Siddharth Rai

May 02, 2026

Cricketers Smoking

90 के दशक में क्रिकेटर सार्वजनिक रूप से सिगरेट पीते थे (photo - reddit/r/Cricket)

धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, ये तो हम सब जानते हैं। लेकिन बात करते हैं उस वीडियो की, जिसमें राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग को ड्रेसिंग रूम में वेप करते देखा गया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इसे "खेल की इज्जत कम करने वाला काम" बताया और उन पर सख्त कार्रवाई की। अब सवाल यह उठता है कि जो बात कल तक सामान्य मानी जाती थी, वही आज अचानक इतना बड़ा स्कैंडल क्यों बन गई?

90 के दशक तक सिगरेट कंपनियां स्पॉन्सर थीं

रियान पराग के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तूफान सा आ गया। कुछ लोग सच में नाराज़ थे, तो कुछ वर्च्यू-सिग्नलिंग कर रहे थे। लेकिन कुछ दशक पहले ऐसी स्थिति बिल्कुल अलग थी। 90 के दशक तक सिगरेट कंपनियां क्रिकेट को खुलेआम स्पॉन्सर करती थीं। विल्स, बेंसन एंड हेजेस जैसे ब्रांड्स के होर्डिंग्स हर स्टेडियम में चारों तरफ दिखते थे। खिलाड़ी अगर सार्वजनिक रूप से सिगरेट पीते नजर आ जाते, तो उनकी मर्दानगी और कूलनेस में और इजाफा माना जाता था।

उस दौर में मालबोरो मैन की छवि सबसे ज्यादा आकर्षक थी। क्लिंट ईस्टवुड जैसी काउबॉय टोपी, आधी बंद आंखें और होंठों के बीच लटकती सिगरेट यही तस्वीर तब 'कूलनेस' का पर्याय मानी जाती थी। 1983 विश्व कप जीतने के बाद लॉर्ड्स की बालकनी में कपिल देव के पास खड़े कृष्णमाचारी श्रीकांत सिगरेट फूंक रहे थे। टीवी पर किसी ने लाल घेरा नहीं लगाया, न ही किसी ने कहा कि गेम की इज्जत गिर गई। उस समय सिगरेट को तनाव कम करने का ज़रिया माना जाता था।

स्पॉन्सरशिप का दौर

1996 विश्व कप भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने मिलकर आयोजित किया था। तब इंडियन टोबैको कंपनी आईटीसी विल्स ने इतना बड़ा टाइटल स्पॉन्सरशिप दिया कि क्रिकेट की कमाई आसमान छू गई। इसका असर ये हुआ कि ग्रामीण भारत में लोग बिड़ी से सिगरेट की ओर शिफ्ट हो गए। खेल तो बढ़ावा पा रहा था, लेकिन खेल अनहेल्दी आदत को भी प्रमोट कर रहा था।

दुनिया भर में यही स्थिति थी। ब्राजील के महान फुटबॉलर सॉक्रेटिस क्यूबा के क्रांतिकारी नेता चे ग्वेरा और फ़िदेल कास्त्रो की तरह सिगरेट छोड़ते ही नहीं थे। डच फुटबॉलर जोहान क्रूइफ हाफ टाइम में सिगरेट जलाते, शावर लेते और मैच की दूसरी हाफ शुरू होने से पहले दूसरी सुलगा लेते। ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर शेन वॉर्न ने अपनी किताब में कई ऐसे खुलासे किए हैं। उन्होंने खुलकर लिखा कि ऑस्ट्रेलियाई ड्रेसिंग रूम में आधे खिलाड़ी नियमित रूप से स्मोक करते थे। ड्रेसिंग रूम सिगरेट की बदबू से भरा रहता था।

वॉर्न ने किताब में खोले कई राज़

अपनी बायोग्राफी 'माई स्पिन' में वॉर्न ने उन दिनों को याद किया जब बेन्सन एंड हेजेस ऑस्ट्रेलियाई टीम को स्पॉन्सर करती थी। वॉर्न लिखते हैं, "वैसे, टीम के आधे खिलाड़ी रेगुलर सिगरेट पीते थे… बूनी, जेफ मार्श, ब्रूस रीड, ग्रेग मैथ्यूज, मैं और फिजियो एरॉल एल्कोट, हम सब सिगरेट पीते थे। यह कुछ हद तक उस समय का कल्चर था और कुछ हद तक स्पॉन्सर की वजह से सिगरेट इतनी आसानी से मिल जाती थी, ड्रेसिंग-रूम में हर कोई बस सिगरेट जला लेता था, रेस्टोरेंट, ट्रेन, कार और हवाई जहाज हर जगह खुलकर स्मोकिंग होती थी।

भारतीय स्पिनर वेंकटपति राजू इंग्लैंड दौरे पर प्लेन के पीछे बैठकर चेन-स्मोकिंग करते थे। राजू हवाई जहाज़ के पिछले हिस्से में सिगरेट पीने वालों के साथ शामिल हो जाते थे। वॉर्न का यह किस्सा काफ़ी मज़ेदार है। वॉर्न ने मजाक में लिखा "वह लगातार सिगरेट पीते थे और 'स्वान लाइट' बियर के दो कैन पीकर पूरी तरह से टल्ली हो जाते थे। मुझे लगता है कि वह अपने कप्तान, मोहम्मद अज़हरुद्दीन से ज़्यादा डरते थे… इसलिए हमने उन्हें ढेर सारी मिंट्स दीं और कहा कि एक घंटे के लिए सो जाएं। सच कहूं तो, मुझे पक्का नहीं पता कि इसका कोई फ़ायदा हुआ या नहीं। वह अपनी इस हरकत से कई दिनों तक शर्मिंदा रहे।"

पराग के केस ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी

रियान पराग युवा हैं और उन्होंने गलती कर दी। शायद अब उन्हें खुद भी शर्मिंदगी महसूस हो रही होगी। लेकिन बीसीसीआई और फ्रैंचाइज़ी को सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, पूरी टीम की संस्कृति की चिंता करनी चाहिए। यह इस सीजन में राजस्थान रॉयल्स का दूसरा ड्रेसिंग रूम कांड है। इससे पहले मैनेजर पर मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के लिए पेनल्टी लग चुकी है। जब कप्तान पूरे टीम के सामने इतने कैजुअली वेप कर रहा हो, जैसे सब चाय पी रहे हों, तो यह व्यक्तिगत आदत नहीं रह जाती। यह टीम में क्या स्वीकार्य है, क्या अनदेखा किया जा रहा है और लीडरशिप का टोन क्या है, इसका स्पष्ट संकेत देता है।

राजस्थान रॉयल्स को इस बात का अंदाज़ा सबसे बेहतर होना चाहिए। क्योंकि उनके को-ओनर और तीन खिलाड़ी पहले स्पॉट-फिक्सिंग के मामले में फंस चुके हैं, जिसके चलते फ्रेंचाईजी को दो साल का बैन झेलना पड़ा था। वह भी कल्चर और निगरानी की नाकामी ही थी।

बड़ी खबरें

View All

क्रिकेट

खेल

ट्रेंडिंग

IPL 2026