
नई दिल्ली| विदर्भ को पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचाने वाले तेज गेंदबाज रजनीश गुरबानी ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने जब अपने कोच चंद्रकांत पंडित को खुश देखा तो वह खुद भावुक हो गए थे। गुरबानी ने दूसरे सेमीफाइनल में कर्नाटक के खिलाफ 12 विकेट लेते हुए अपनी टीम को फाइनल में जगह दिलाई।
मैच के बाद भावुक हुए
मैच के बाद उन्होंने कहा, "अंतिम विकेट लेने और चंदू सर की प्रतिक्रिया देखने के बाद मैं काफी भावुक हो गया था। गुरबानी ने कहा, "मैं पूरी रात काफी घबराया हुआ था। पहले मैं 12:30 बजे उठा, मुझे लगा कि सुबह के छह बज गए हैं। इसके बाद में 4:30 बजे उठा और इसके बाद मैं सो नहीं सका। पांच बजे उठकर मैं तैयार होने लगा और छह बजे तक तैयार हो गया। दो बार क्वार्टर फाइनल में मात खाने के बाद इस साल हम फाइनल खेलने को लेकर काफी प्रतिबद्ध थे।"
इंजीनियर है गुरबानी
गुरबानी ने सीविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने अपना पहला लिस्ट-ए मैच बीई के आखिरी सेमेस्टर को 80 प्रतिशत के साथ पास करने के बाद खेला था। उन्होंने कहा, "जब मैं मैदान पर गया तो कोच ने मुझे प्रोत्साहन दिया और किसी तरह मुझे शांत किया। मैदान के अंदर जब विकेट नहीं मिल रहे थे तो मुझे काफी परेशानी हो रही थी। इसके बाद मेरे सीनियर खिलाड़ियों, कप्तान और चंदू सर ने मुझे शांत रहने को कहा।"
उमेश यादव ने की मदद
इस युवा गेंदबाज ने कहा कि भारतीय टीम के लिए खेलने वाले उमेश यादव के टीम में रहने से उन्हें काफी मदद मिली। उन्होंने कहा, "उमेश यादव के रहने से मुझे काफी मदद मिली। उमेश भईया के साथ गेंदबाजी की शुरुआत करना मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है। वह एक छोर से गेंदबाजी कर रहे थे और मैं उन्हें देख रहा था। वह मेरे प्ररेणास्त्रोत हैं और पसंदीदा गेंदबाज भी।"
Updated on:
22 Dec 2017 10:11 am
Published on:
22 Dec 2017 10:11 am
