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जब टीम में जगह न मिलने से निराश होकर हरभजन सिंह बनना चाहते थे ट्रक ड्राइवर

पिता के देहांत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी हरभजन सिंह के कंधों पर आ गई थी। हरभजन सिंह के परिवार में पांच बहनें और मां थी। हरभजन के पास न तो नौकरी थी और ना ही उन्हें टीम में जगह मिल रही थी।

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अपनी फिरकी से अच्छे—अच्छे बल्लेबाजों को परेशान करने वाले स्पिनर हरभजन सिंह आज अपना 41वां बर्थडे मना रहे हैं। हरभजन सिंह का जन्म 3 जुलाई, 1980 को जालंधर में हुआ था। हरभजन सिंह ने अपने क्रिकेट कॅरियर में कई रिकॉर्ड बनाए। हरभजन सिंह ने टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए पहली हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड बनाया। टेस्ट क्रिकेट में हरभजन सिंह ने 417 विकेट लिए हैं। उन्होंने 103 टेस्ट मैच खेले हैं। इसके अलावा 236 वनडे और 28 टी20 मैच खेले हैं। वनडे में हरभजन सिंह के नाम 269 विकेट हैं। इसके साथ ही हरभजन सिंह टी20 वर्ल्ड कप 2007 और 2011 वर्ल्ड कप विजेता टीम इंडिया का हिस्सा रह चुके हैं। हालांकि एक वक्त ऐसा भी था जब हरभजन सिंह टीम इंडिया में जगह न मिलने से निराश होकर क्रिकेट छोड़ ट्रक ड्राइवर बनना चाहते थे।

डेब्यू के डेढ़ साल बाद ही हो गए थे टीम से बाहर
हरभजन सिंह ने टीम इंडिया के लिए वर्ष 1998 में डेब्यू किया था। हालांकि डेढ़ साल बाद ही उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था। उस वक्त अनिल कुंबले टीम इंडिया के स्टार स्पिनर थे। कुंबले की गैर मौजूदगी में ही दूसरे स्पिनर्स को मौका मिलता था। ऐसे में मौका न मिलने की वजह से और टीम से बाहर होने के कारण हरभजन सिंह काफी निराश हो गए थे। इसी दौरान हरभजन सिंह के पिता का देहांत हो गया था। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी हरभजन सिंह के कंधों पर आ गई थी। हरभजन सिंह के परिवार में पांच बहनें और मां थी। वहीं हरभजन सिंह के पास न तो नौकरी थी और ना ही उन्हें टीम में जगह मिल रही थी। ऐसे में उन्होंने परिवार चलाने के लिए क्रिकेट छोड़ ट्रक ड्राइवर बनने का फैसला कर लिया था।

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बहनों ने रोक लिया
हरभजन सिंह कनाड़ा जाकर ट्रक चलाना चाहते थे। वहीं बहनों ने हरभजन सिंह को ऐसा करने से रोक लिया। बहनों ने उन्हें क्रिकेट पर ज्यादा मेहनत करने के लिए कहा। इसके बाद हरभजन सिंह ने वर्ष 2000 में रणजी 2000 रणजी ट्रॉफी में कमाल का प्रदर्शन करते हुए 5 मैचों में 28 विकेट चटकाए।रणजी में उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए वर्ष 2001 में टीम इंडिया में उनकी वापसी हुई और फिर हरभजन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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दिखाया अपनी स्पिन का कमाल
कुंबले के चोटिल होने के बाद वर्ष 2001 में उन्हें टीम इंडिया में जगह मिली। इसी दौरान ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत दौरे पर टेस्ट सीरीज के लिए आई थी। इस टेस्ट सीरीज में हरभजन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर कहर बनकर टूटे थे। सीरीज का पहला मैच टीम इंडिया हार गई थी। इसके बाद दूसरे टेस्ट मैच में हरभजन ने 13 और तीसरे टेस्ट में 15 विकेट चटकाए। इस सीरीज में हरभजन सिंह ने कुल 32 विकेट लिए थे। इसी सीरीज में वह टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर बने। उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 'टर्बोनेटर' नाम मिला।