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यशस्वी जायसवाल के हाथों में दिनभर एक ही शॉट खेल-खेलकर पड़ जाते थे छाले… जानें उनकी सफलता की कहानी

Yashasvi Jaiswal : भारतीय टीम में युवा यशस्वी जायसवाल ने जो मुकाम हासिल किया है, वह किसी के रहमो करम नहीं, बल्कि जी तोड़ मेहनत के बल पर बनाया है। उनकी इस सफलता के पीछे के राज का खुलासा किया है, मुंबई के पूर्व खिलाड़ी जुबिन भरूचा ने। जिन्होंने यशस्वी को यहां तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

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यशस्वी जायसवाल के हाथों में दिनभर एक ही शॉट खेल-खेलकर पड़ जाते थे छाले, जानें उनकी सफलता की कहानी

Yashasvi Jaiswal : वेस्टइंडीज के खिलाफ डेब्यू टेस्ट में शानदार 171 रन की शतकीय पारी खेलकर युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने सबको अपना मुरीद बना लिया है। जायसवाल किसी के रहमो करम नहीं, बल्कि जी तोड़ मेहनत कर यहां तक पहुंच सके हैं। उनकी इस सफलता के पीछे के राज का खुलासा किया है, मुंबई के पूर्व खिलाड़ी जुबिन भरूचा ने। उन्होंने बताया कि जायसवाल एक ही शॉट की प्रैक्टिस 300 बार करता था और उसे 100 मीटर दूर गेंद भेजने का लक्ष्य दिया जाता था। उसने अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए बेसबॉल कोच के साथ काम किया और लगातार अभ्यास के चलते उसके हाथों में छाले भी पड़ जाते थे, लेकिन उसने कभी हिम्मत नहीं हारी।


दरअसल, आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के हाई परफार्मेंस निदेशक और मुंबई के पूर्व बल्लेबाज जुबिन भरूचा यशस्वी जायसवाल खेल को सुधारने में बड़ा योगदान दिया है। जुबिन ने पीटीआई-भाषा को बताया कि जब वह अंडर-19 भारतीय टीम के लिए खेलकर आया तो ट्रायल के दौरान यशस्वी ने पहली ही बॉल पर स्क्वेयर की तरफ शानदार फ्लिक किया। उसका वह शॉट कमाल का था। मैंने उस बॉल पर उसमें गजब का आत्मविश्वास देखा।

यशस्वी ने शून्य से शुरू किया सफर

भरूचा ने बताया कि जब जायसवाल से मिले थे, तब वह महज 18 साल का था। उन्होंने कहा कि एक कहावत है कि चैंपियन बनने के लिए एक गांव की आवश्यकता होती है। यशस्वी की अब तक की यात्रा में योगदान देने वाले कई लोग हैं, मैं भी उनमें से एक हूं। वह ऐसे स्थान से आया था, जहां उसके पास कुछ करने के बहुत कम मौके थे। वह पूरी तरह ये जानता है कि उसका सफर शून्य से शुरू हुआ।

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कोविड के दौरान भी जारी रहा अभ्‍यास

भरूचा ने बताया कि जायसवाल को प्रैक्टिस के लिए वह तालेगांव ले गए, ताकि उसका पूरा फोकस खेल पर रहे। यहां तक कि कोविड महामारी के दौरान भी यशस्वी वहीं रहा और लगातार अभ्यास करता रहा। भरूचा ने रॉयल्स एकेडमी में प्रशिक्षण का खुलासा करते हुए बताया कि हमारे पास एक स्पष्ट प्‍लान था। उन्होंने कहा कि चाहे 300 कट शॉट खेलने हों या 300 रिवर्स स्वीप या फिर 300 पारंपरिक स्वीप खेलने हों, हमें तब तक नहीं रुकना है, जब तक हम उस विशेष शॉट के लिए स्थिरता हासिल नहीं करते।

'हाथ में पड़ जाते थे छाले'

उन्होंने बताया कि यशस्वी जायसवाल भी कुछ ऐसा ही करता था। वह आक्रामक स्ट्रोक लगाने में थोड़ा पिछड़ रहा था। इसलिए उसे बेसबॉल से अभ्यास कराया गया। उसे अलग-अलग वजन की गेंद और बल्ले से रोजाना 100 शॉट मारने के लिए कहा जाता था। इसके साथ ही उसे शॉट को 100 मीटर दूर मारने का टारगेट भी दिया जाता था। ऐसा करने से उसके हाथ में छाले भी पड़ जाते थे, लेकिन वह अभ्‍यास से कभी पीछे नहीं हटा।

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